कहते हैं कि अगर मेहनत और लगन सच्ची हो, तो कामयाबी अपना रास्ता खुद बना लेती है. मंजिल तक पहुंचने के लिए दृढ़ इरादों की ज़रूरत होती है, न कि बड़े संसाधनों की. बेगूसराय से सामने आई दिल को छू लेने वाली एक ऐसी ही कहानी आज के अभिभावकों और बच्चों को प्रेरित करने वाली है. इस कहानी के केंद्र में आंगनवाड़ी में काम करने वाली एक ऐसी मां हैं, जिन्होंने अपने बच्चे को भले ही बड़े संसाधन न मुहैया कराए हों, लेकिन मंजिल तक पहुंचाने के लिए उसके इरादों को हमेशा मज़बूत किया. मां के इसी हौसले का परिणाम है कि अब उनका बेटा एसडीएम बन गया है.
दरअसल, बेगूसराय जिले के रजौरा गांव के रहने वाले किसान अजीत कुमार और आंगनबाड़ी सेविका अंशु देवी के पुत्र कांतेश कुमार ने अपने पहले ही प्रयास में बीपीएससी परीक्षा में शानदार दोहरी सफलता हासिल कर अपनी प्रतिभा का डंका बजाया है
शुरू से ही मेधावी रहे हैं कांतेश
कांतेश की शैक्षणिक यात्रा शुरू से ही असाधारण रही है. उन्होंने वर्ष 2017 में सूबे के प्रतिष्ठित सिमुलतला आवासीय विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा में राज्य भर में 8वीं रैंक हासिल की थी. इसके बाद वर्ष 2019 में उन्होंने विकास विद्यालय, बेगूसराय से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान एनआईटी त्रिची का रुख किया, जहाँ से वर्ष 2023 में उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री प्राप्त की.
सेल्फ स्टडी और खुद के नोट्स बने सफलता का आधार
एनआईटी त्रिची से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद कांतेश ने प्रशासनिक सेवा को अपना लक्ष्य बनाया. अपनी रणनीति साझा करते हुए कांतेश ने बताया कि उनकी यह सफलता पूरी तरह से सेल्फ स्टडी पर आधारित रही. उन्होंने अपनी तैयारी के लिए किसी भी ऑनलाइन क्लास या कोचिंग का सहारा नहीं लिया.तैयारी की शुरुआत के लिए उन्होंने सबसे पहले बीपीएससी के पूरे सिलेबस का गहराई से विश्लेषण किया. इसके बाद एनसीईआरटी, प्रामाणिक रेफरेंस बुक्स और चुनिंदा अध्ययन सामग्री की मदद से अपने खुद के नोट्स तैयार किए. कांतेश का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए सबसे ज़रूरी यह है कि विद्यार्थी सीमित और भरोसेमंद स्रोतों से ही पढ़ाई करें तथा उसी सामग्री का बार-बार रिवीजन करें.
अब IAS बनकर देश सेवा का है सपना
पहली ही कोशिश में एसडीएम जैसा गरिमामय पद हासिल करने के बाद भी कांतेश के कदम रुकने वाले नहीं हैं. उनका कहना है कि एसडीएम बनना उनका एक लक्ष्य था जो पूरा हो गया, लेकिन उनका अंतिम सपना संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर एक आईएएस अधिकारी बनना और बड़े स्तर पर देश की सेवा करना है.
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को सफलता का मूलमंत्र देते हुए कांतेश ने कहा कि इसके लिए दिन-रात किताबों में उलझे रहना ज़रूरी नहीं है. यदि पूरे समर्पण और एकाग्रता के साथ नियमित रूप से प्रतिदिन छह घंटे भी ईमानदारी से पढ़ाई की जाए, तो किसी भी बड़े लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकता है.





