देश दुनिया

5 लाख श्रद्धालु, 400 टन कचरे और खच्चरों के गोबर से बिजली… अमरनाथ यात्रा में देश का मिसाल बनेगा कचरा प्रबंधन का मॉडल

श्रीनगर। श्री अमरनाथ यात्रा लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ पर्यावरण चेतना व कचरा प्रबंधन की भी नई राह दिखा रही है। यात्रा के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं पर हिमालय कि मनमोहक चोटियों और यात्रा ट्रैक पर इस दौरान कचरा न फैले यह प्रबंध सुनिश्चित कर लिए गए हैं। यात्रा के दौरान सिंगल यूल प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक है और कचरा कम करने के लिए श्रद्धालुओं को कपड़े के थैले दिए जा रहे हैंसाथ ही खच्चरों की लीद को विशेष मशीनों से इकट्ठी कर इससे बायोगैस प्लांट चलाए जा रहे हैं। इससे बायो ईंधन पेदा होगा और यात्रा मार्ग पर किसी तरह का कचरा नहीं होगा। इंदौर की संस्था स्वाहा मैनेजमेंट को कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई।कंपनी के सीईओ डॉ. समीर शर्मा ने बताया कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यात्रा मार्ग पर जरा सा भी कचरा न जमा हो। कचरे को इकट्ठा करना उसे अलग से प्रोसेस किया जाना है। यात्रा खत्म होने के बाद पर्यावरण वीर यह सुनिश्चित करेंगे कि पूरे ट्रैक से कचरा हटा लिया जाए और चोटियों को पूरी तरह स्वच्छ बनाने के बाद ही वह वहां से निकलें।

दोनों रास्तों पर लगाए गए हैं डस्टबिन

पवित्र गुफा तक जाने वाले दोनों रास्तों पर डस्टबिन लगाए गए हैं, जबकि तीर्थयात्रा के दौरान निकलने वाले ठोस और तरल दोनों तरह के कचरे को इकट्ठा करने के लिए सफाई कर्मचारी लगाए गए हैं। उनके अनुसार तीर्थयात्रियों के व्यवहार में बदलाव इस पहल का एक अहम भाग है।

नुक्कड़ नाटकों व कठपुतली शो से किया जा रहा जागरूक

उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के बीच पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए यात्रा मार्गों पर स्थापित किए गए भंडारों में नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। तीर्थयात्रियों से आग्रह किया जा रहा है कि वे थाली, कटोरी और चम्मच जैसे रियूजेबल स्टील के बर्तन साथ रखें ताकि डिस्पोजेबल कचरा कम से कम हो।

यात्रियों से प्लास्टिक बैग प्रयोग न करने और उसकी जगह कपड़े के बैग प्रयोग करने का भी आग्रह किया है। अभियान के तहत तीर्थयात्रियों में अभी तक लगभग 1.5 लाख कपड़े के बैग बांटे गए हैं जिससे ताकि पवित्र गुफा के आसपास का नाजुक वातावरण प्रदूषित न हो।

जमा हो सकता है 400-700 टन कचरा

इस वर्ष तीर्थयात्रियों की संख्या पांच लाख से ज्यादा होने की उम्मीद है। हालांकि, तीन जुलाई से शुरू हुई यात्रा में अभी तक ढाई लाख से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा के दर्शन कर चुके हैं।

संबंधित अधिकारियों का अनुमान है कि इस वर्ष यात्रा अवधि के दौरान दोनों यात्रा मार्गों से इकट्ठा किया जाने वाला कचरा लगभग 400 टन तक पहुंच सकता है। इस बीच यदि पवित्र गुफा के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या छह लाख तक बढ़ जाती है तो कचरे का बोझ भी बढ़ सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।ज़ीरो-लैंडफिल यात्रा करने में सफलता मिलती है, तो यह देश में सस्टेनेबल तीर्थयात्रा मैनेजमेंट के लिए एक बड़ा मील का पत्थर होगा। शर्मा कहते हैं कि तीर्थयात्रियों को याद रखना चाहिए कि वह एक साफ और ग्रीन यात्रा के लिए आ रहे हैं, न कि पर्यावरण को गंदा करने के लिए।

डेढ़ लाख कपड़े के थैले तैयार

अगर कोई श्रद्धालु पालीथीन बैग लेकर पहुंचता भी है तो उसे आधार शिविर से आगे ले जाने की इजाजत नहीं होगी। इन श्रद्धालुओं को कपड़े का थैला निश्शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। दोनों आधार शिविरों में डेढ़ लाख कपड़े के थैले तैयार रखे हैं। साथ ही भंडारा संगठनों व यात्रा मार्ग पर दुकानदारों को भी स्टील की प्लेट व गिलास का ही प्रयोग करना होगा।

स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने पर जोर

प्लास्टिक के गिलास के उपयोग पर भारी जुर्माने का प्रविधान किया गया है। लक्ष्य एक ही है-बाबा बर्फानी की यात्रा को पूरी तरह स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त बनाया जाए। कचरा प्रबंधन की भी व्यवस्था कर ली गई है। श्री बाबा अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी इंदौर के गैर सरकारी संगठन “स्वाहा रिसोर्स मैनेजमेंट” को सौंपी है।

जम्मू-कश्मीर का ग्रामीण स्वच्छता विभाग इसकी निगरानी करेगा। यात्रा मार्ग पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए चार हजार कर्मचारी तैनात किए गए हैं, जबकि 623 कर्मचारी कचरा प्रबंधन देखेंगे।

प्रधानमंत्री ने भी की थी अपील

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी यात्रा आरंभ होने के साथ श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए यात्रियों से अपील की थी वह यात्रा के दौरान कचरा न फैलाएं और पर्यावरण संरक्षण पर फोकस करें।

Manoj Mishra

Editor in Chief

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button