छत्तीसगढ़

स्वच्छ कबीरधाम का मंत्र: लाल में सेनेटरी, काले डिब्बे में इलेक्ट्रिक कचरा

*स्वच्छ कबीरधाम का मंत्र: लाल में सेनेटरी, काले डिब्बे में इलेक्ट्रिक कचरा*

*कचरा मिक्स करना मतलब बीमारी को घर बुलाना – कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा*

कबीरधाम, जुलाई। “एक गलत आदत पूरे गांव को बीमार कर सकती है। इसलिए अब कचरा अलग होगा और सोच भी अलग होगी।” इस संकल्प के साथ कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा के निर्देशन में जिले में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को जनआंदोलन बनाने की मुहिम तेज हो गई है। घर-घर संपर्क अभियान के माध्यम से लोगों को कचरा पृथक्करण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल के मार्गदर्शन में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की टीम तथा विभागीय अमला गांव-गांव पहुंचकर “स्वच्छ कबीरधाम का मंत्र” जन-जन तक पहुंचा रहा है।

15 जुलाई से जिले में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन शुरू किया जाएगा। आगामी 2 अक्टूबर 2026 तक जिले की 60 ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए स्वच्छता दीदी, संकुल समन्वयक, विकासखंड समन्वयक एवं पंचायत सचिव घर-घर जाकर लोगों को कचरा पृथक्करण के लिए प्रेरित करेंगे और चार रंगों के डस्टबिन के उपयोग की जानकारी देंगे।

अभियान के तहत लोगों को बताया जा रहा है कि हरे डिब्बे में गीला कचरा जैसे सब्जी, फल एवं भोजन अवशेष डालें, जिससे वर्मी खाद तैयार की जा सके। नीले डिब्बे में कागज, प्लास्टिक एवं कपड़े जैसे सूखे कचरे को रखें, जिससे उसका पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) हो सके। लाल डिब्बे में सेनेटरी पैड, डायपर और सुई जैसे खतरनाक कचरे को अलग रखें, जिससे स्वच्छता दीदियों और सफाई कर्मियों को संक्रमण से बचाया जा सके। वहीं काले डिब्बे में बैटरी, बल्ब, पेंट, कीटनाशक तथा एक्सपायरी दवाइयों जैसे विशेष कचरे को रखने की अपील की जा रही है, ताकि मिट्टी, जल और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाया जा सके।

कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने कहा कि लाल डिब्बे में सेनेटरी सामग्री और सुई अलग रखने से स्वच्छता दीदियों और सफाई कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, जबकि काले डिब्बे में बैटरी एवं अन्य हानिकारक अपशिष्ट रखने से खेत, नदियां और पर्यावरण सुरक्षित रहते हैं। उन्होंने कहा कि कचरे को मिलाकर फेंकना बीमारी और प्रदूषण को बढ़ावा देना है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि यह केवल शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी का अभियान है। प्रत्येक परिवार को चार रंगों के डस्टबिन की व्यवस्था कर कचरे का पृथक्करण करना है। जो परिवार मिश्रित कचरा देंगे या नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध ग्राम पंचायतों द्वारा नियमानुसार जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी तथा संबंधित पंचायत की स्वच्छता रैंकिंग भी प्रभावित होगी।
अभियान को जनआंदोलन बनाने के लिए स्वच्छता दीदियां गांवों में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगी। स्कूलों में “लाल-काला” विषय पर चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। धर्मगुरु एवं सामाजिक कार्यकताओं के माध्यम से कचरा पृथक्करण का संदेश दिया जाएगा, जबकि व्यापारियों के लिए दुकानों में चार रंगों के डस्टबिन रखना अनिवार्य किया जाएगा। अभियान के दौरान ग्रामीणों ने भी कचरा पृथक्करण अपनाने का संकल्प लिया। ग्राम पंचायतों में बुजुर्गों ने कहा कि पहले सभी प्रकार का कचरा एक जैसा लगता था, लेकिन अब लाल और काले डिब्बे के महत्व की जानकारी मिली है और वे इस व्यवस्था का पालन कर स्वच्छ कबीरधाम के अभियान को सफल बनाएंगे।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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