छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पी. सुंदरराज को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में बड़ी जिम्मेदारी मिली है. केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी देते हुए उन्हें एनआईए में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया है. वह लंबे समय तक बस्तर क्षेत्र में आईजी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वह अपने काम करने के तरीके और सुरक्षा अभियानों में अहम भूमिका को लेकर वे काफी चर्चा में रहे हैं. आइए जानते हैं, उनके बारे में.
सुंदरराज ने नक्सल विरोधी अभियानों में निभाई अहम भूमिका
पी. सुंदरराज की गिनती छत्तीसगढ़ के अनुभवी और कुशल पुलिस अधिकारियों में होती है. उन्होंने राज्य में कई अहम पदों पर रहते हुए अपनी प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व कौशल का परिचय दिया है. खासकर से बस्तर में उनकी भूमिका को काफी तारीफ मिली थी. बस्तर में तैनाती के दौरान उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों को प्रभावी ढंग से संचालित किया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दिया.
सुंदरराज ने साल 2003 में क्रैक कर दी सिविल सर्विसेज परीक्षा
पी. सुंदरराज का जन्म 27 फरवरी 1980 को तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में हुआ था. उन्होंने अपनी पढ़ाई कोयंबटूर के लोकल स्कूलों से की. उन्होंने ग्रेजुएशन में बीएससी एग्रीकल्चर चुना. इसके बाद वह यूपीएससी की तैयारी में जुट गए. 2003 में वह सिविल सर्विसेज परीक्षा क्रैक कर आईपीएस बन गए और उन्होंने छत्तीसगढ़ कैडर मिला. उनका ज्यादातर समय नक्सल एरिया में ही बीता है
केंद्र सरकार द्वारा एनआईए जैसे देश के प्रमुख जांच एजेंसी में पी. सुंदरराज की नियुक्ति को छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच करने वाली इस एजेंसी में आईजी के पद पर नियुक्ति किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी जाती है.
उनकी नियुक्ति से न केवल छत्तीसगढ़ पुलिस का गौरव बढ़ा है, बल्कि यह राज्य के पुलिस अधिकारियों के लिए भी प्रेरणादायक माना जा रहा है. पुलिस और प्रशासनिक हलकों में उनके एनआईए में आईजी बनाए जाने पर खुशी जताई जा रही है.





