बोकारो: आज के दौर में जहां युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद शहरों की ओर भाग रहे हैं. वहीं बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड के युवा अजीत महतो ने गांव में ही रहकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है. फिजिक्स ऑनर्स से ग्रेजुएशन करने के बाद अजीत ने मुर्गी पालन (पोल्ट्री फार्मिंग) को एक सफल व्यवसाय के रूप में चुना है. आज वे अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं.
पड़ोसी किसान से मिली प्रेरणा
अजीत ने बताया कि उन्हें मुर्गी पालन की प्रेरणा अपने पड़ोसी गांव तेलों के एक प्रगतिशील किसान से मिली. उनकी सफलता को देखकर अजीत ने इस क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया. आज वे पिछले पांच वर्षों से सफलतापूर्वक इस व्यवसाय को चला रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि व्यवसाय संभालने के साथ-साथ अजीत अपनी रेलवे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं.
व्यापार का गणित, 4000 मुर्गियों से लाखों की कमाई
अजीत के पास वर्तमान में करीब 4000 मुर्गियों का स्टॉक है. वे बेहतर देखभाल और पोषण सुनिश्चित करने के लिए एक प्लॉट में लगभग 2000 मुर्गियों का पालन करते हैं. मुर्गी की खेप मात्र 35 दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाती है. एक मुर्गी को तैयार करने में लगभग 80 रुपये का खर्च आता है. थोक बाजार में इनका रेट 120 से 130 रुपये प्रति किलो तक मिलता है. 4000 मुर्गियों के पालन में करीब 3 लाख रुपये की लागत आती है.
आमतौर पर एक मुर्गी का वजन एक से डेढ़ और दो किलो तक होता है. जिससे प्रति मुर्गी करीब 150 रुपये तक की बिक्री हो जाती है. अजीत के अनुसार यदि 2% मृत्यु दर (मॉर्टेलिटी) को भी मान लिया जाए, तो 3500 मुर्गियों की सफल बिक्री से लगभग 5 लाख रुपये प्राप्त होते हैं. लागत हटाकर पशुपालक आसानी से 2 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकता है.
युवाओं को दी खास सलाह
अजीत महतो का मानना है कि सही जानकारी और मेहनत से गांव में रहकर भी शहर जैसी कमाई की जा सकती है. उन्होंने इच्छुक युवाओं को सलाह दी है कि इस व्यवसाय को शुरू करने से पहले प्रशिक्षण लेना अत्यंत आवश्यक है. उचित ट्रेनिंग के बिना रिस्क बढ़ जाता है. अजीत ने साबित कर दिया है कि मुर्गी पालन कम समय में युवाओं के लिए बेहतर आय का एक सशक्त साधन बन सकता है.





