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एक फैक्ट्री के लिए बनाना पड़ा था पूरा का पूरा रेलवे स्टेशन! मजदूरों को दी गई थी सुविधा, आज बना शहर की पहचान

भारतीय रेलवे आमतौर पर शहरों की जनता की सुविधा के लिए स्टेशन बनाता है, लेकिन झारखंड की राजधानी रांची के हटिया रेलवे स्टेशन की कहानी इससे बिल्कुल अलग है. इसे खासतौर पर एक बड़ी फैक्ट्री के हजारों मजदूरों की सुविधा के लिए बनाया गया थाआज यह स्टेशन ना सिर्फ रांची का महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्ट हब है बल्कि शहर की औद्योगिक विरासत की भी पहचान बन चुका है. हटिया रेलवे स्टेशन (स्टेशन कोड – HTE) हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HEC) के ठीक पास स्थित है. ये भारत का ऐसा रेलवे स्टेशन है, जिसे एक फैक्ट्री के कारण बनाया गया था. आज हम इसका इतिहास आपको बताते हैं.फैक्ट्री के लिए बना स्टेशन
1950 के दशक में जब केंद्र सरकार ने रांची में हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन की स्थापना की तो यहां हजारों इंजीनियर, टेक्नीशियन और मजदूर काम करने लगे. सोवियत संघ की मदद से बनी यह फैक्ट्री स्टील, कोयला, खनन और भारी मशीनरी बनाने का बड़ा केंद्र थी. फैक्ट्री में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर दूर-दूर से आते थे, जिसमें बिहार, झारखंड, ओडिशा और अन्य राज्यों से आने वाले मजदूर शामिल है. उन्हें परिवार से जोड़ने, कच्चा माल लाने और तैयार माल भेजने के लिए रेल कनेक्टिविटी बेहद जरूरी थी. सामान्य बस या सड़क सुविधा पर्याप्त नहीं थी. इसलिए रेलवे ने फैक्ट्री प्रबंधन और मजदूरों की मांग पर हटिया में एक पूरा स्टेशन विकसित करने का फैसला किया.हो गई मजदूरों को सुविधा
स्टेशन का निर्माण मुख्य रूप से HEC के मजदूरों और इंजीनियरों की सुविधा को ध्यान में रखकर किया गया. यहां से ट्रेनें रांची, राउरकेला, गोमोह और अन्य प्रमुख शहरों को जोड़ती थी. मजदूर अपनी छुट्टियों में घर जा सकें, फैक्ट्री का सामान आसानी से लोड-अनलोड हो सके– यही स्टेशन बनाने का उद्देश्य था. धीरे-धीरे स्टेशन सिर्फ फैक्ट्री तक सीमित नहीं रहा. आसपास की आबादी बढ़ी और यह रांची का दूसरा बड़ा स्टेशन बन गया. आज हटिया स्टेशन साउथ ईस्टर्न रेलवे जोन के अंतर्गत आता है. यह रांची-राउरकेला रेल खंड पर स्थित है और कई एक्सप्रेस तथा पैसेंजर ट्रेनों का टर्मिनल है. स्टेशन पर कई प्लेटफॉर्म, वेटिंग रूम, टिकट काउंटर और अन्य सुविधाएं हैं. हाल के वर्षों में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इसे 355 करोड़ रुपये की लागत से इसका जीर्णोद्वार किया जा रहा है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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