गाजियाबाद:आजकल लाइफस्टाइल में बदलाव, खराब खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं. एक बार जब डायबिटीज हो जाती है तो इसे कंट्रोल में रखना ही एकमात्र उपाय है. फिट दादाजी के नाम से पहचाने जाने वाले महिपाल सिंह आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं.
65 साल की उम्र में जहां अधिकतर लोग बीमारियों और सीमित दिनचर्या में उलझ जाते हैं वहीं महिपाल सिंह ने डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी को अपनी ताकत में बदल दिया है. महिपाल सिंह ने न सिर्फ अपनी बढ़ती शुगर लेवल को नियंत्रित किया, बल्कि खुद को एक सफल मैराथन धावक के रूप में स्थापित कर दिया है.
साल 2021 की शुरुआत में महिपाल सिंह के जीवन में एक बड़ा बदलाव आया. उनके शरीर में सुस्ती बढ़ गई, अधिक प्यास लगने लगी और थोड़ा बहुत कम करने के बाद थकावट महसूस होने लगी. स्वास्थ्य जांच करने पर पता चला कि उनका शुगर लेवल सामान्य से काफी अधिक है. शुरुआत में महिपाल सिंह ने बढ़ते शुगर लेवल को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया लेकिन कुछ महीनों में स्थिति गंभीर हो गई. शुगर लेवल बढ़ता गया जिससे उनकी चिंता भी बढ़ने लगी. महिपाल सिंह के बेटों ने डॉक्टर के पास ले जाकर इलाज शुरू करवाया. डॉक्टर द्वारा दवाइयां के साथ-साथ खानपान में भी सुधार की सलाह दी गई.
उस वक्त लगा था कि अब लाइफ पहले जैसे नहीं रहेगी-महिपाल सिंह
दवाइयों के इस्तेमाल के बाद थोड़ी बहुत राहत जरूर मिली लेकिन मानसिक रूप से महिपाल सिंह काफी परेशान रहने लगे. उन्हें अक्सर महसूस होता था कि अब जिंदगी पहले जैसी नहीं रह पाएगी. इसी बीच महिपाल सिंह के एक परिचित ने उन्हें सलाह दी की नियमित रूप से सुबह की सैर और हल्की एक्सरसाइज करने से शुगर को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. परिचित द्वारा दी गई सलाह उनके मन में बैठ गई और उन्होंने इसे आजमाने का फैसला किया.परिवार को था दौड़ में चोटिल होने का डर
महिपाल सिंह गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित हाई राइज सोसाइटी में रहते हैं. सोसाइटी के पार्क में वाकिंग ट्रेक बना हुआ है. शुरुआत में उन्होंने 10 से 15 मिनट वॉकिंग ट्रैक पर टहलने शुरू किया. महिपाल सिंह 10 से 15 मिनट वॉक करते और वापस आ जाते क्योंकि इतना करना भी आसान नहीं था. गुजरते वक्त के साथ उन्होंने वॉक करने के समय को बढ़ाया और 30 मिनट तक नियमित वर्कआउट करने लगे. इसी के साथ उन्होंने हल्की दौड़ भी शुरू कर दी. महिपाल सिंह की दौड़ को लेकर परिवार के लोग चिंतित थे क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं चोट ना लग जाए. कई बार परिवार द्वारा दौड़ लगाने के लिए मना भी किया गया लेकिन महिपाल सिंह ने सावधानी के साथ अपनी दिनचर्या को जारी रखने का फैसला लिया.महिपाल सिंह ने शुरुआत में 500 मी. दौड़ लगाना शुरू किया. कुछ ही महीनों में यह दूरी किलोमीटर में तब्दील हो गई. जब उनकी दौड़ की दूरी बढ़ने लगी तो सोसाइटी में दौड़ना संभव नहीं था ऐसे में महिपाल सिंह ने आसपास की सड़कों पर दौड़ना शुरू किया. कुछ वक्त के बाद महिपाल सिंह ने फैसला लिया कि वह सड़क पर नहीं दौड़ेंगे. महिपाल सिंह ने दौड़ लगाने के लिए क्रिकेट ग्राउंड को चुना.दौड़ने से शुगर लेवल में आई कमी
कुछ महीनो तक दौड़ लगाने के बाद महिपाल सिंह का शुगर लेवल काम होना शुरू हो गया और नियमित जांच में परिणाम बेहतर आने लगे. कुछ महीनो में ही अनुशासन और समर्पण से महिपाल सिंह ने अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया. महिपाल सिंह ने जब शुगर टेस्ट कराया तो रिपोर्ट ने उन्हें खुश कर दिया. महिपाल सिंह का शुगर लेवल कंट्रोल में था. महिपाल सिंह के सामने चुनौती अब शुगर लेवल को मेंटेन रखना था. अपनी फिटनेस को देखते हुए महिपाल सिंह ने मैराथन में भाग लेना शुरू किया. विजय 4 वर्षों के दौरान महिपाल सिंह ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की मैराथन में भाग लिया और मेडल भी जीते.
महिपाल सिंह ने न सिर्फ अपनी शुगर को कंट्रोल किया बल्कि वरिष्ठ नागरिकों अच्छा डायबिटीज से लड़ने के लिए जागरूक भी कर रहे हैं. महिपाल सिंह अब सुबह में अकेले नहीं दौड़ते बल्कि अब कई सीनियर सिटीजन उनके साथ दौड़ते हैं. महिपाल सिंह को लोग फिट दादाजी कहकर भी पुकारते हैं.





