भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित ओडिशा में शनिवार देर रात कैबिनेट की एक बैठक हुई। इस बैठक में ओडिशा की सरकार ने राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में दशकों से चली आ रही आरक्षण व्यवस्था को बदल दिया है। अब राज्य के मेडिकल, इंजीनियरिंग और उच्च तकनीक की शिक्षा देने वाले कॉलेजों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) के लिए आरक्षण की सीमा को लगभग दोगुना कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का कहना है कि यह कदम इन समुदायों की जनसंख्या के अनुपात में उन्हें अधिकार देने और सामाजिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। सबसे खास बात यह है कि पहली बार पिछड़ा वर्ग (SEBC) के छात्रों के लिए भी तकनीकी शिक्षा के द्वार आरक्षण के जरिए खोले गए हैं।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, अब राज्य के उच्च और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में सीटों का बंटवारा नई दरों पर होगा। अनुसूचित जनजाति (ST) को मिलने वाले आरक्षण को 12% से बढ़ाकर 22.50% कर दिया गया है। वहीं, अनुसूचित जाति (SC) के कोटा को 8% से बढ़ाकर 16.25% कर दिया गया है। पिछड़ा वर्ग (SEBC) के लिए पहली बार 11.25% सीटें आरक्षित की गई हैं, जिन्हें अब तक कोई आरक्षण नहीं मिल रहा था। इन बदलावों के बाद भी सरकार ने कुल आरक्षित सीटों को 50% की सीमा के भीतर ही रखा है, ताकि कानूनी जटिलताओं से बचा जा सके।
मेडिकल और इंजीनियरिंग की सीटों पर सीधा प्रभाव
नए नियमों का सबसे बड़ा लाभ उन छात्रों को मिलेगा जो डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देख रहे हैं। ओडिशा में यूजी और पीजी कोर्स को मिलाकर मेडिकल की कुल सीटें 2,421 हैं। एसटी छात्रों के लिए पहले 290 सीटें थीं, अब बढ़कर 545 हो जाएंगी। एससी समुदाय से आने वाले छात्रों के लिए पहले 193 सीटें थीं, अब बढ़कर 393 हो जाएंगी। SEBC छात्रों के लिए अब 272 सीटें सुरक्षित होंगी।
इंजीनियरिंग की बात करें तो ओडिशा में कुल 44,579 सीटें हैं। एसटी समुदाय के छात्रों के लिए पहले 5,349 सीटें थीं, अब 10,030 सीटें मिलेंगी। एससी छात्रों के लिए पहले 3,566 सीटें थीं, अब 7,244 सीटें मिलेंगी। SEBC छात्रों के लिए 5,015 सीटें आरक्षित होंगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह नीति राज्य के सभी विश्वविद्यालयों, उनसे संबद्ध कॉलेजों, सरकारी संस्थानों (ITIs) और पॉलिटेक्निक पर लागू होगी। इसके दायरे में मेडिसिन, सर्जरी, डेंटल, नर्सिंग और फार्मेसी जैसे विषय होंगे। इनके अलावा, मैनेजमेंट, कंप्यूटर एप्लीकेशन (MCA) और आर्किटेक्चर भी इस दायरे में आएंगे। पशु चिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथी और कृषि विज्ञान से जुड़े कोर्स में भी इस नई आरक्षण व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
आबादी के अनुपात में अधिकार
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तक SC और ST छात्रों को उनकी आबादी के मुकाबले बहुत कम सीटें मिल रही थीं। उन्होंने कहा, “पिछली सरकारों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे इन समुदायों के सशक्तिकरण में बाधा आ रही थी। हमारी सरकार ने सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए यह ऐतिहासिक कदम उठाया है।”
भाजपा का मास्टरस्ट्रोक?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा सरकार का यह फैसला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहरा राजनीतिक महत्व भी रखता है। SEBC को पहली बार आरक्षण देकर भाजपा ने राज्य के एक बड़े वोट बैंक को सीधा संदेश दिया है। ST और SC कोटे में भारी वृद्धि कर पार्टी ने इन समुदायों में अपनी स्थिति और मजबूत करने की कोशिश की है।
नवीन पटनायक के गढ़ में सेंध
दशकों तक राज्य की सत्ता पर काबिज रही बीजू जनता दल (BJD) ने पिछड़ों के लिए इस तरह के बड़े कदम नहीं उठाए थे, जिसका फायदा अब भाजपा उठाना चाहती है।





