जमशेदपुर. गर्मी का मौसम आते ही झारखंड के कई गांवों में एक खास तरह का प्राकृतिक पेय चर्चा में आ जाता है, जिसे लोग खजूर का रस या ताड़ी (जब वो फरमेंट हो जाता है) के नाम से जानते हैं. यह न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. गांवों में आज भी यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है. खजूर का रस जहां फायदेमंद होता है, वहीं ताड़ी बन जाने पर यानी फरमेंट होने पर इसे हेल्दी नहीं कहा जाता.
काफी मेहनत भरी है प्रक्रिया
अजय बताते हैं कि खजूर का रस निकालने की प्रक्रिया काफी रोचक और मेहनत भरी होती है. इसकी शुरुआत रात से ही हो जाती है. सबसे पहले खजूर के पेड़ को चुना जाता है, फिर उसके ऊपरी हिस्से पर हल्की सी कट लगाई जाती है. इसके बाद वहां एक मिट्टी या प्लास्टिक की हांडी टांग दी जाती है, ताकि रातभर पेड़ से निकलने वाला मीठा रस उसमें इकट्ठा होता रहे.
रातभर टपकता है रस
रातभर धीरे-धीरे टपकता यह रस सुबह तक हांडी में भर जाता है. खास बात यह है कि इस रस को सूरज निकलने से पहले ही उतार लिया जाता है, क्योंकि धूप लगने के बाद इसमें खमीर बनने लगता है और इसका स्वाद बदलने लगता है. सुबह-सुबह ताजा निकाला गया यह रस बेहद मीठा, ठंडा और ताजगी से भरपूर होता है.
गांवों में लोग इसे ऐसे ही कच्चा पीना पसंद करते हैं, जबकि कुछ लोग इसे हल्का ठंडा करके भी पीते हैं. बाजार में इसकी कीमत आमतौर पर 30 से 40 रुपए प्रति लीटर होती है, जो इसे सस्ता और आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध बनाता है.
एक नहीं देता है बहुत सारे फायदे
अगर इसके फायदों की बात करें, तो खजूर का रस शरीर को ठंडक पहुंचाता है और गर्मी से राहत दिलाता है. इसमें प्राकृतिक शुगर होती है, जो तुरंत ऊर्जा देने का काम करती है. साथ ही यह पाचन तंत्र को ठीक रखने में मदद करता है और गैस की समस्या को भी कम करता है. कई लोग मानते हैं कि यह ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी सहायक होता है.
गांव वालों का नेचुरल एनर्जी ड्रिंक
इतना ही नहीं, नियमित रूप से इसका सेवन करने से त्वचा पर भी निखार आता है और शरीर अंदर से तरोताजा महसूस करता है. यही कारण है कि गांवों में इसे ‘नेचुरल एनर्जी ड्रिंक’ के रूप में देखा जाता है. खजूर का रस सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि झारखंड की परंपरा, प्रकृति और सेहत का अनमोल मेल है, जो हर गर्मी में लोगों को ठंडक और ताजगी का एहसास कराता है.





