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अब काम में देरी पर ठेकेदार को डबल फाइन, विभाग ने जनरल कंडीशन ऑफ कांट्रैक्ट के क्लॉज-2 में किया संशोधन

प्रदेश में जलशक्ति विभाग के विकास कार्यों को लटकाने वालों पर अब दोगुना जुर्माना लगेगा। विभाग ने जनरल कंडीशन ऑफ कॉन्ट्रैक्ट के क्लॉज-2 में संशोधन कर नई व्यवस्था बना दी है। इसके तहत अब कार्य में देरी पर कार्य करने वाले ठेकेदार पर 20 प्रतिशत जुर्माना लगेगा। जानकारी के अनुसार जलशक्ति विभाग ने प्रदेश में विकास कार्यों को गति प्रदान करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब अगर कोई ठेकेदार तय समय में काम पूरा नहीं करता है, तो उसे पहले के मुकाबले दोगुना जुर्माना देना होगा। विभाग की ओर से जारी नए आदेशों में साफ किया गया है कि देरी पर लगने वाले मुआवजे की सीमा दस प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दी गई है। पुरानी व्यवस्था के तहत अगर किसी काम में देरी होती थी, तो ठेकेदार से अधिकतम 10 फीसदी तक ही जुर्माना वसूला जा सकता था। विभागीय आदेशों के तहत यह नियम केवल पूरे प्रोजेक्ट पर ही नहीं, बल्कि उसके अलग-अलग हिस्सों पर भी लागू होगा। अगर किसी बड़े प्रोजेक्ट को हिस्सों में बांटकर अलग-अलग समय सीमा तय की गई है, तो जिस हिस्से में देरी होगी, उसी के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनुबंध की बाकी सभी शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

केवल देरी से जुड़े इस प्रावधान को संशोधित किया गया है। इसके साथ ही सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस बदलाव को तुरंत लागू करें और जनरल कंडीशन ऑफ कॉन्ट्रैक्ट में इसे शामिल करें। इस आदेशों को विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया है। सरकार का मानना है कि कई बार परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पातीं, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में यह फैसला ठेकेदारों को जिम्मेदार बनाने और काम में तेजी लाने के लिए लिया गया है। विभाग का भी मानना है कि नई व्यवस्था से अब ठेकेदार काम की समय सीमा को लेकर ज्यादा गंभीर रहेंगे। इसी माह विभाग ने यह आदेश जारी किए है और उन्हें तत्काल प्रभाव से भी लागू कर दिया है। सरकार के इस फैसले को विकास कार्यों में तेजी लाने और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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