बलौदाबाजार: कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने शुक्रवार को तहसील कार्यालय और स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का औचक निरीक्षण किया. इसके बाद उन्होंने कसडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी इंस्पेक्शन किया. निरीक्षण के दौरान राजस्व कार्यों की स्थिति, कार्यालयीन व्यवस्था और परीक्षा संचालन की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया गया. निरीक्षण के दौरान तहसील कार्यालय में लंबित मामलों को लेकर कलेक्टर ने स्पष्ट नाराजगी जताई. राजस्व प्रकरण में आरआई की रिपोर्ट आने के ढाई महीने बाद भी ऑर्डर शीट पूरी नहीं किए जाने को गंभीर लापरवाही माना गया और संबंधित तहसीलदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए.
तहसील कार्यालय में पेंडिंग केसों की समीक्षा
तहसील कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर ने सबसे पहले राजस्व मामलों की स्थिति की समीक्षा की. उन्होंने लंबित प्रकरणों की फाइलें मंगवाकर देखा कि किस स्तर पर मामलों का हल रुका हुआ है. जांच के दौरान पाया गया कि कुछ प्रकरणों में आरआई का प्रतिवेदन आने के बाद भी लंबे समय से ऑर्डर शीट पूरी नहीं की गई थी. इस पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि राजस्व मामलों में अनावश्यक देरी से ग्रामीणों को परेशानी होती है और प्रशासन की छवि भी प्रभावित होती है. उन्होंने साफ कहा कि सरकारी कामकाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लंबित मामलों का जल्द से जल्द निराकरण किया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए.
कलेक्टर ने ग्रामीणों से किया संवाद
निरीक्षण के दौरान तहसील कार्यालय में मौजूद ग्रामीणों से भी कलेक्टर ने सीधे बातचीत की. उन्होंने पूछा कि राजस्व से जुड़े कामों में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं हो रही है. ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं बताईं, जिनमें जमीन से जुड़े प्रकरण, नकल प्राप्त करने की प्रक्रिया और अन्य राजस्व कार्य शामिल थे. कलेक्टर ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए और लोगों को अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें. उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य लोगों को राहत देना है, इसलिए हर अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए काम करना चाहिए.
नकल शाखा की व्यवस्था का जायजा लिया
तहसील कार्यालय के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर नकल शाखा भी पहुंचे. यहां उन्होंने क्लर्क से पूछा कि प्रतिदिन कितने आवेदन प्राप्त हो रहे हैं. कितने आवेदनों का हल किया जा रहा है. उन्होंने नकल प्राप्त करने वाले एक ग्रामीण आकाश शर्मा से फोन पर बात कर यह जानने की कोशिश की कि प्रक्रिया में कोई दिक्कत तो नहीं आई. ग्रामीण ने बताया कि उन्हें समय पर नकल मिल गई और किसी प्रकार की समस्या नहीं हुई. इस बातचीत के बाद कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नकल वितरण की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि ग्रामीणों को परेशानी न उठानी पड़े.
लोक सेवा केंद्र और भुइया कक्ष का किया निरीक्षण
कलेक्टर ने तहसील कार्यालय के भीतर स्थित लोक सेवा केंद्र और भुइया कक्ष का भी निरीक्षण किया गया. यहां उपलब्ध सुविधाओं और कार्यप्रणाली का अवलोकन किया गया. निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई की स्थिति को लेकर भी निर्देश दिए गए. कलेक्टर ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और सुव्यवस्था होना जरूरी है क्योंकि यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपने काम के लिए आते हैं. उन्होंने कर्मचारियों को निर्देशित किया कि कार्यालय परिसर को व्यवस्थित और साफ रखा जाए.
स्वामी आत्मानंद स्कूल में परीक्षा का जायजा लिया
तहसील कार्यालय के निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का भी निरीक्षण किया. उस समय स्कूल में कक्षा दसवीं की गणित विषय की परीक्षा संचालित हो रही थी. कलेक्टर ने परीक्षा केंद्र के अंदर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और केंद्राध्यक्ष से परीक्षा संचालन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली. उन्होंने परीक्षा कक्षों की व्यवस्था, विद्यार्थियों की उपस्थिति और सुरक्षा संबंधी इंतजामों के बारे में विस्तार से पूछा. परीक्षा में कुल 450 विद्यार्थियों के लिए व्यवस्था की गई थी, जिनमें से 436 विद्यार्थी उपस्थित पाए गए.
परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी और अनुशासित माहौल में आयोजित की जाए. परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही नहीं होनी चाहिए. विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी परीक्षाओं में प्रशासन और स्कूल प्रबंधन दोनों की जिम्मेदारी होती है कि सभी नियमों का सख्ती से पालन किया जाए. परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि विद्यार्थियों को शांत और अनुकूल वातावरण मिल सके- कुलदीप शर्मा, कलेक्टर, बलौदाबाजार
प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने की पहल
इस निरीक्षण को प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. राजस्व कार्यों में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों से अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश गया है कि काम में ढिलाई अब स्वीकार नहीं की जाएगी. तहसील कार्यालय में लंबित प्रकरणों की समीक्षा और नोटिस जारी करने के निर्देश से यह भी संकेत मिला है कि प्रशासन कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर है और जवाबदेही तय की जाएगी.
कसडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का किया औचक निरीक्षण
जिले के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रशासन लगातार सक्रिय नजर आ रहा है. इसी कड़ी में कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने विकासखंड कसडोल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का विस्तृत निरीक्षण कर अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान अस्पताल में दवा वितरण, वार्ड व्यवस्था, सोनोग्राफी सुविधा, पोषण पुनर्वास केंद्र और अन्य विभागों की स्थिति को बारीकी से परखा गया तथा आवश्यक सुधार के लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए. निरीक्षण के दौरान सबसे पहले अस्पताल के दवा वितरण केंद्र की व्यवस्था पर ध्यान दिया गया. यहां केवल एक फार्मासिस्ट के कारण मरीजों को दवाइयां लेने में काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा था. इस स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन को जीवन दीप समिति के माध्यम से दो अतिरिक्त फार्मासिस्ट की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों को समय पर दवा मिल सके और भीड़ की समस्या समाप्त हो.
ओपीडी और पंजीयन व्यवस्था की समीक्षा
अस्पताल के ओपीडी कक्ष में पहुंचकर पंजीयन व्यवस्था की भी समीक्षा की गई. यहां मरीजों की संख्या और पंजीयन प्रक्रिया को देखा गया तथा यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि मरीजों को अनावश्यक रूप से लाइन में खड़ा न रहना पड़े. अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पंजीयन से लेकर जांच और उपचार तक की पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित और सुचारु ढंग से संचालित होनी चाहिए. अस्पताल के विभिन्न कक्षों में जाकर वहां उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों और व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली गई. अधिकारियों से कहा गया कि स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों को बेहतर और त्वरित उपचार मिलना चाहिए.निरीक्षण के दौरान यह जानकारी सामने आई कि अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा सीमित दिनों में उपलब्ध है, जिसके कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसे ध्यान में रखते हुए सोनोग्राफी सेवा को महीने में निर्धारित तीन दिनों तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए. तय कार्यक्रम के अनुसार हर महीने की 7, 14 और 21 तारीख को सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया. इस निर्णय से क्षेत्र के गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को जांच के लिए दूर-दराज के अस्पतालों में जाने की जरूरत कम पड़ेगी.
वार्ड व्यवस्था और स्वच्छता पर जोर
अस्पताल के मेल और फीमेल वार्ड का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने वार्डों की व्यवस्था को बेहतर बनाने के निर्देश दिए. अधिकारियों से कहा गया कि महिला और पुरुष वार्ड को पूरी तरह अलग-अलग संचालित किया जाए ताकि मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सके. इसके साथ ही अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए भी विशेष निर्देश दिए गए. वार्डों के साथ जुड़े शौचालयों को नियमित रूप से साफ रखने और साफ-सफाई की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया.
दवा स्टॉक और रिकॉर्ड की जांच
दवा भंडारण कक्ष का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने वहां उपलब्ध दवाइयों की सूची और उनकी स्थिति की जानकारी ली. अधिकारियों से पूछा गया कि दवाइयों की अवधि समाप्त होने से पहले उनकी जांच और अलग करने की प्रक्रिया किस तरह की जाती है. दवा प्रबंधन को व्यवस्थित रखने और समय-समय पर स्टॉक की जांच करने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों को आवश्यक दवाइयां समय पर मिल सकें और किसी भी प्रकार की कमी की स्थिति न बने.
आपातकालीन कक्ष में लापरवाही पर सख्ती
निरीक्षण के दौरान आपातकालीन कक्ष में एक कर्मचारी अनुपस्थित पाया गया. इस पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित कर्मचारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए. यह स्पष्ट किया गया कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में ड्यूटी के प्रति लापरवाही बिल्कुल स्वीकार नहीं की जाएगी. अधिकारियों से कहा गया कि सभी कर्मचारी समय पर उपस्थित रहें और अपने दायित्वों का पूरी गंभीरता के साथ निर्वहन करें.
कुपोषित बच्चों की स्थिति की ली जानकारी
अस्पताल में संचालित एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) कक्ष का भी निरीक्षण किया गया. यहां भर्ती कुपोषित बच्चों की स्थिति की जानकारी ली गई और उनके उपचार व पोषण व्यवस्था की समीक्षा की गई.
कुपोषित बच्चों को निर्धारित डायट चार्ट के अनुसार समय पर पूरक पोषण आहार दिया जाए और उनकी नियमित निगरानी की जाए. इससे बच्चों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार लाने में मदद मिलेगी- कुलदीप शर्मा, कलेक्टर, बलौदाबाजार
फिजियोथेरेपी कक्ष का निरीक्षण
कलेक्टर ने फिजियोथेरेपी कक्ष में उपचार ले रहे मरीजों से सीधे बातचीत कर उनसे उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली. मरीजों ने यहां मिलने वाली सेवाओं पर संतोष जताया. फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा किए जा रहे कार्य की सराहना करते हुए कहा गया कि इसी तरह मरीजों को बेहतर उपचार मिलता रहे, इसके लिए निरंतरता बनाए रखी जाए.
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की पहल
निरीक्षण के दौरान स्पष्ट संकेत दिया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है. अस्पतालों में बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण और समीक्षा की जाएगी. अधिकारियों से कहा गया कि मरीजों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर उसका त्वरित समाधान किया जाए.
प्रशासन की मौजूदगी से बढ़ा भरोसा
इस निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी भी मौजूद रहे. अधिकारियों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और आवश्यक सुधार के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की बात कही. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्रशासनिक अधिकारी स्वयं अस्पतालों का निरीक्षण करते हैं तो व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद बढ़ जाती है. इससे कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय होती है और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलने की संभावना मजबूत होती है. ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. यहां बड़ी संख्या में लोग प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आते हैं। ऐसे में यदि अस्पताल की व्यवस्थाएं बेहतर हों तो लोगों को समय पर उपचार मिल सकता है. कसडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के इस निरीक्षण के बाद उम्मीद की जा रही है कि अस्पताल की कई व्यवस्थाओं में जल्द सुधार दिखाई देगा





