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सहारा समूह ने बेच खाई 32 एकड़ जमीन, कई राज्यों में ईडी की रेड, पढ़ें रिलीज

 

भुवनेश्वर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कोलकाता जोनल ऑफिस ने सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड से जुड़ी जमीन बिक्री के कथित घोटाले में ओडिशा के बरहामपुर, भुवनेश्वर के अलावा कर्नाटक के बल्लारी और आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई ‘हमारा इंडिया एंड अदर्स’ से जुड़े मामले में की गई, जिसमें बरहामपुर स्थित 43 एकड़ जमीन की बिक्री की जांच चल रही है।

ईडी के अनुसार जांच में सामने आया है कि दिसंबर 2025 में इस जमीन में से करीब 32 एकड़ हिस्सा एक रद्द किए जा चुके बोर्ड रेजोल्यूशन के आधार पर अवैध तरीके से बेच दिया गया। यह सौदा सहारा समूह के एक कर्मचारी के पक्ष में किया गया था, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन बताया जा रहा है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया सहारा समूह के वरिष्ठ प्रबंधन के निर्देश पर की गई।

छापेमारी के दौरान ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17 के तहत कई लोगों के बयान दर्ज किए। जांच में जमीन की घोषित कीमत और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच बड़ा अंतर भी पाया गया। एजेंसी ने डिजिटल साक्ष्य जैसे व्हाट्सऐप चैट, कॉल लॉग, संपर्क विवरण के साथ ही वित्तीय रिकॉर्ड, अकाउंट बुक और अन्य अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।

ईडी ने इस मामले की जांच विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। ये एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120B के तहत एम/एस हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (HICCSL) और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई थीं। सहारा समूह से जुड़ी अलग-अलग कंपनियों के खिलाफ अब तक 500 से अधिक एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें से 300 से ज्यादा मामले मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हैं।

जांच एजेंसी का आरोप है कि सहारा समूह ने निवेशकों से बड़ी रकम जुटाकर एक तरह की पोंजी स्कीम चलाई। परिपक्व जमा राशियों का भुगतान करने के बजाय धन को दोबारा निवेश में लगाया गया और खातों में हेरफेर कर बकाया रकम छिपाने की कोशिश की गई।

जांच में यह भी सामने आया है कि समूह के भीतर आपसी लेनदेन के जरिए भारी देनदारियों को बिना ठोस व्यावसायिक कारणों के इधर-उधर स्थानांतरित किया गया और बड़ी राशि चार सहकारी समितियों में ट्रांसफर की गई। वित्तीय संकट के बावजूद निवेशकों से नई जमा राशि लेना जारी रखा गया।

ईडी का कहना है कि जमा धन का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर बेनामी संपत्तियां बनाने, कर्ज देने और निजी उपयोग में लगाया गया, जिससे निवेशकों को उनकी राशि नहीं मिल सकी। अब तक एजेंसी पांच अस्थायी अटैचमेंट आदेश जारी कर कई जमीनों और संपत्तियों को जब्त कर चुकी है।

मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है, जिनमें अनिल वेलापरम्पिल अब्राहम और ओ.पी. श्रीवास्तव फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी इस मामले में एक अभियोजन शिकायत और एक पूरक शिकायत अदालत में दाखिल कर चुकी है, जबकि जांच अभी जारी है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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