छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश की नई व्यवस्था ने हजारों गरीब परिवारों के सपनों पर पानी फेर दिया है। सरकार ने इस सत्र से ‘नर्सरी’ को आरटीई की एंट्री क्लास से बाहर कर दिया है। इस कारण प्रदेश भर में करीब 33 हजार सीटें कम हो गई हैं।
पिछले साल तक जहां निजी स्कूलों में 53 हजार सीटें उपलब्ध थीं, वहीं अब केवल कक्षा-1 में प्रवेश होगा, जिसमें मात्र 19,536 सीटें ही बची हैं। इससे नर्सरी और प्री-प्राइमरी उम्र के बच्चे आरटीई के दायरे से बाहर हो गए हैं। समस्या यह है कि प्रदेश के अधिकांश सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी (नर्सरी, पीपी-1, पीपी-2) की पढ़ाई का ढांचा ही नहीं है।
केवल कुछ चुनिंदा आत्मानंद स्कूलों में यह सुविधा है। ऐसे में 3 से 5 साल की उम्र के बच्चों के लिए ‘राइट टू एजुकेशन’ कागजों तक सिमट गया है। अब गरीब माता-पिता के सामने संकट खड़ा हो गया है- या तो भारी-भरकम फीस भरकर निजी स्कूल भेजें। या आंगनबाड़ी भेजें। या फिर बच्चे को एक-दो साल तक घर पर बैठाए रखें। इस बीच, आरटीई के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 31 मार्च तक फॉर्म भरे जाने हैं।
पिता की दुविधा, इतनी फीस कैसे दें? रायपुर के पास रहने वाले शिव कुमार एक निजी कंपनी में ऑफिस असिस्टेंट हैं। वे बीपीएल में आते हैं। वे इस साल बेटे राजेश (4 वर्ष) को नर्सरी में आरटीई के तहत अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाने की तैयारी में थे। लेकिन नियम बदलने के बाद नर्सरी में आरटीई के तहत दाखिला नहीं होगा। पास के स्कूल प्रबंधन ने प्री-प्राइमरी की फीस सालाना करीब 15 हजार रुपए बताई। शिव का कहना है- मेरी सालाना आमदनी ही डेढ़ लाख है। प्राइवेट की इतनी फीस देना मेरे लिए मुश्किल है।
घरेलू कामगार मां बोली- पैसे नहीं हैं दुर्ग की सरिता साहू घरों में काम करती हैं। उनका बेटा अरुण 4 साल का है। उनके मोहल्ले में पिछले साल दो बच्चों का नर्सरी में आरटीई से दाखिला हुआ था। इस बार वे भी आवेदन करने वाली थीं, लेकिन नए नियम ने समस्या खड़ी कर दी है। वे कहती हैं कि एक साल घर पर रखेंगे तो पढ़ाई में पीछे रह जाएगा। सरकारी स्कूलों में नर्सरी है नहीं। आंगनबाड़ी भेजने से भी कुछ फायदा नहीं होगा। समझ नहीं आ रहा क्या करूं। प्राइवेट की फीस देने की हालत है नहीं।
आरटीई एक्ट में 6 से 14 साल तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा का प्रावधान
स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 साल पहले ऐसे परिवारों के बच्चों के लिए नर्सरी क्लास से ही आरटीई का प्रावधान किया था। इससे सभी निजी स्कूलों में नर्सरी की 25% सीट आरटीई में आरक्षित हो गई थीं, पर नए बदलावों के बाद नए सत्र से सिर्फ कक्षा पहली में प्रवेश होगा। पिछली बार नर्सरी, केजी-1 और कक्षा-1 को एंट्री क्लास माना गया था।
भास्कर एक्सपर्ट – बीकेएस.रे, पूर्व अपर मुख्य सचिव, छग शासन
नर्सरी से पढ़ाई नहीं तो पिछड़ सकते हैं बच्चे बचपन मजबूत होता है, तभी बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। यदि बच्चे प्री-प्राइमरी स्तर की पढ़ाई स्कूलों में नहीं करेंगे, तो उनके पिछड़ने की संभावना बनी रहेगी। इसलिए यह आवश्यक है कि सरकारी स्कूलों में भी नर्सरी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों को शिक्षा की मजबूत और समान शुरुआत मिल सके।





