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जिद या जुनून…मां को खोया, शादी के दबाव में छोड़ा घर, ट्यूशन पढ़ाकर की तैयारी और अफसर बन गई मेरठ की बेटी

क्या सफलता जिद या न रुकने वाले जुनून से मिलती है? अगर मेरठ की बेटी संजू रानी वर्मा की यात्रा देखी जाए तो हां कहा जा सकता है। अपनी मां को खोने के बाद उन्हें उन चीजों का सामना करना पड़ा, जो शायद उन्होंने नहीं सोचा था। शादी करने के लिए सामाजिक दबाव बढ़ा तो घर भी छोड़ दिया। आर्थिक चुनौतियां आईं तो ट्यूशन पढ़ाकर और पार्ट टाइम जाॅब की। हर मुश्किल ने उनके हौंसले का इम्तिहान लिया लेकिन पक्का इरादा नहीं डगमगाया। निराशा की जगह सपनों को चुनकर वह आगे बढ़ती रहीं। 2018 में UPPCS की परीक्षा क्रैक करके वह काॅमर्शियल टैक्स ऑफिसर बनीं। उनकी   बताती है कि सपने पूरा करने का जुनून किसी भी बाधा को पार कर सकता है।

मेरठ की निवासी, ग्रेजुएशन के बाद तैयारी

एक इंटरव्यू में संजू रानी वर्मा (Sanju Rani Verma) बताती हैं कि वह मेरठ जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वह हमेशा चाहती थीं कि बड़े होकर अधिकारी बनें। 2008 से ही उन्होंने अपनी तैयारी शुरू कर दी थी।उन्होंने पहली बार परीक्षा दी थी। उन्हें मेंस लिखने का भी मौका मिला लेकिन बीच में कुछ परिस्थितियों की वजह उन्होंने अपनी तैयारी को छोड़ दिया था। बीच में उन्हें मौका मिला तो उन्होंने यूपीपीसीएस का अंटेप्ट दिया और उन्हें पहले की तैयारी का फायदा मिला। उनका मानना है कि फोकस सिर्फ फाइनल सेलक्शन पर रखना है और अपनी तैयारी ईमानीदारी से करनी है। सिलेबस और पैटर्न को सही से देखने के बाद आपकी जर्नी डिसाइड होता है।

 

2013 से उनका असली संघर्ष शुरू हुआ, जब उनकी मां का निधन हो गया। इस दौरान उनके जीवन अजीब मोड़ पर था। परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई छोड़कर शादी कर लें। हालांकि, संजू ने अपने सपने को प्राथमिकता दी और घर छोड़ दिया। जब परिस्थितियों का सामना करके हम लड़ जाते हैं तो हम अपनी सफलता के करीब पहुंचते हैं। उनका निर्णय भी थोड़ा मुश्किल था लेकिन सफलता के लिए आगे बढ़ना ही था।

दोबारा शुरू की तैयारी, पढ़ाई ट्यूशन

2017 में उन्होंने अपनी तैयारी दोबारा शुरू कर दी। एक छोटे से किराए के कमरे में   के सपने के लिए संघर्षों का सामना करने लगीं। आर्थिक चुनौतियां इनती बढ़ गई थीं कि अपनी तैयारी के साथ-साथ उन्हें बच्चों को ट्यूशन पढ़ानी पड़ी। ट्यूशन पढ़ाने के बाद जो पैसे मिलते तो उससे उनका किताबों और घरेलू खर्च निकलता था।

2018 में UPPCS क्रैक कर बनीं CTO

कई साल की कड़ी मेहनत के बाद   2018 क्रैक की। वह 145 रैंक हासिल लाकर काॅमर्शिल टैक्स अधिकारी (CTO) बनी थीं। संजू वर्मा की कहानी इस बात का प्रमाण है कि पक्का इरादा बड़ी से बड़ी मुश्किलों का सामना करने का हौंसला देता है। दबाव और संघर्ष के बाद उनकी सफलता आज लाखों युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है जो हिम्मत, सब्र और खुद पर भरोसा रखते हैं।

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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