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स्नान पर नहीं, पहिया लगी पालकी पर थी आपत्ति…, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के संगम स्नान प्रकरण पर माघ मेला प्रशासन ने रखा पक्ष

प्रयागराज। माघ मेला में मौनी अमावस्या महापर्व के महास्नान पर रविवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के डुबकी न लगाने के प्रकरण में सोमवार दोपहर को स्वामी ने मीडिया से बात की तो पुलिस-प्रशासन के उच्चाधिकारियों ने भी अपना पक्ष रखा। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि उन्हें स्नान करने से नहीं रोका गया, बल्कि आग्रह किया गया। आपत्ति तो सिर्फ पहिया लगी पालकी पर थी, जिस पर सवार होकर संगम नोज तक जाना चाहते थे। उस समय संगम नोज पर स्नानार्थियों की भारी भीड़ थी और पहिया लगी पालकी पर सवार होकर वह घाट तक जाते तो भगदड़ अथवा कोई भी अनहोनी की घटना होने की आशंका थी।

सुरक्षा व प्रोटोकाल को प्रशासन ने इंकार कर दिया था

प्रयागराज मेला प्राधिकरण में मंडलायुक्त ने कहा कि वह बिना पूर्व सूचना के सैकड़ों अनुयाइयों संग वाहन से संगम के पास बैरियर तक पहुंचे। शनिवार को दो वाहनों, सुरक्षा व प्रोटोकाल की मांग की थी, जिस पर प्रशासन ने इन्कार कर दिया था। बिना अनुमति के वह निकले और पांटून पुल दो का बैरियर तोड़ते हुए संगम की ओर बढ़े। तब संगम पर स्नानार्थियों का अत्यधिक दबाव था मगर वह नहीं मानें।इसके आगे बढ़े और संगम टावर के पास का बैरियर भी तोड़ दिया।

सीसीटीवी फुटेज से प्रकरण की कराई जाएगी जांच

डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि ज्योतिष्पीठ और बद्रिकाश्रम पीठ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्लाज-ए में उल्लिखित निर्देशों का पालन कराना प्रशासन व पुलिस की जिम्मेदारी है। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने कहा कि बैरियर तोड़ने से लेकर संगम मार्ग को तीन घंटे तक बाधित रखने की सीसीटीवी फुटेज खंगालकर प्रकरण की जांच कराई जा रही है, जिस पर वैधानिक कार्यवाही कराई जाएगी। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डाॅ. अजयपाल शर्मा, डीआइजी मुख्यालय विजय ढुल, एसपी मेला नीरज पांडेय व उप मेलाधिकारी विवेक शुक्ला भी मौजूद रहे।

क्या कहते हैं मेलाधिकारी

मेलाधिकारी ऋषि राज ने कहा कि तीन घंटे तक संगम मुख्य वापसी मार्ग को बाधित किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा व सहूलियत के लिए तैनात सैकड़ों पुलिस कर्मियों को व्यवस्था संभालने में चेन बनानी पड़ी।

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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