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ग्रीष्मकालीन गणना में 45% की वृद्धि; देसी और सफेद गिद्ध ज्यादा

दक्षिण पन्ना वनमंडल में हाल ही में संपन्न तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना 2026 में औसतन 836 गिद्ध दर्ज किए गए हैं। यह संख्या गर्मियों के मौसम में बीते कई दशकों में सर्वाधिक है। पिछले वर्ष अप्रैल 2025 की गणना में यह आंकड़ा 575 था, जिससे एक वर्ष में गिद्धों की आबादी में 45 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

दक्षिण वन विभाग द्वारा 24 मई को जारी आंकड़ों के अनुसार, इस तीन दिवसीय अभियान के दौरान पहले दिन 869, दूसरे दिन 847 और तीसरे दिन 792 गिद्ध देखे गए। इन तीनों दिनों का औसत 836 गिद्ध रहा।

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दियों की तुलना में गर्मियों में गिद्धों की संख्या आमतौर पर कम दर्ज की जाती है। इसका कारण यह है कि कई प्रवासी प्रजातियाँ मार्च-अप्रैल के दौरान भारत छोड़कर अपने मूल आवास क्षेत्रों की ओर लौट जाती हैं।

फरवरी 2026 में हुई शीतकालीन गणना में यहां गिद्धों की सात प्रजातियां देखी गई थीं, जिनमें से हिमालयन ग्रिफन, यूरेशियन ग्रिफन और सिनेरेयस जैसी प्रवासी प्रजातियां मध्य एशिया व पर्वतीय क्षेत्रों की ओर वापस जा चुकी हैं।

इनकी सबसे ज्यादा संख्या

इसके बावजूद, भीषण गर्मी में पन्ना में इतनी बड़ी संख्या में गिद्धों का मिलना क्षेत्र में पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आवास की उपलब्धता को दर्शाता है। इस गणना में मुख्य रूप से चार निवासी प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें देसी (इंडियन/लॉन्ग-बिल्ड) गिद्ध और सफेद (इजिप्शियन) गिद्धों की संख्या सर्वाधिक थी। इनके अतिरिक्त व्हाइट-रम्प्ड और रेड-हेडेड (किंग) गिद्ध भी देखे गए।

घातक दवाओं पर रोक

डीएफओ अनुपम शर्मा ने बताया कि पिछले डेढ़ वर्षों में वन विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों, गौशालाओं और मेडिकल स्टोर्स पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया है। गिद्धों के लिए घातक मानी जाने वाली प्रतिबंधित दवाओं जैसे डाइक्लोफेनाक, एसिक्लोफेनाक, केटोप्रोफेन और निमेसुलाइड के उपयोग पर कड़ाई से रोक लगाई गई है, और उनके सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा दिया गया है।

इस वर्ष की गणना में पारंपरिक कागजी तरीकों के बजाय हाई-टेक मोबाइल ऐप का उपयोग किया गया। इससे गणना की डेटा एंट्री और प्रजातिवार वितरण का वैज्ञानिक विश्लेषण अधिक सटीक और व्यवस्थित हो सकेगा

​दुर्गम जंगलों में वनकर्मियों ने बहाया पसीना

​इस बेहद कठिन और दुर्गम वन क्षेत्रों में पैदल भ्रमण कर गणना को सफल बनाने में मैदानी वनकर्मियों की भूमिका की उच्च स्तर पर सराहना की जा रही है। रेंज ऑफिसर नीतेश पटेल और विवेक जैन के कुशल नेतृत्व में टीम ने इस कार्य को अंजाम दिया। गणना के दौरान गिद्ध विशेषज्ञ दिलशेर खान द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

फील्ड में मुस्तैदी दिखाने वाले वनरक्षकों व गणनाकारों में मुख्य रूप से पियूष शाक्य, राकेश बधौलिया, सतेंद्र सिंह भदौरिया, पुष्पेन्द्र पाल, मनीष कुमार वर्मा, सचिन, महेन्द्र पटेल, सचेन्द्र मोहन, मनीष यादव, भारती कुमार, धीरेन्द्र सिंह, प्रेमशंकर सिंह, रजनीश चौरसिया, सतीश द्विवेदी, राजेश अहिरवार, देवेंद्र पटेल, शिवम मिश्रा, अजय सिंह, रामदयाल अहिरवार, कमलेश पटेल, अशोक विश्वकर्मा, योगेन्द्र सिंह, सुरेश पटेल, धर्मेन्द्र यादव, लखन आदिवासी, विजय अहिरवार, उमेश तिवारी, राजकुमार पटेल, मुकेश प्रजापति एवं विनोद अहिरवार का विशेष योगदान रहा।

रविवार को पूरी हुई गणना

​डीएफओ अनुपम शर्मा ने बताया कि यह गिद्ध गणना 22 मई 2026 से शुरू हुई थी जो रविवार 24 मई तक चली। इस दौरान सुबह 5 बजे से 9 बजे तक गिद्दों की गणना की गई। गिद्धों को प्रकृति का ‘सफाईकर्मी’ कहा जाता है।

ये मृत पशुओं के शवों को तेजी से साफ कर पर्यावरण को जीवाणुओं और गंभीर संक्रामक बीमारियों से बचाते हैं। दक्षिण पन्ना में इनकी बढ़ती संख्या यह साबित करती है कि यहाँ का ईको-सिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) बेहद समृद्ध और स्वस्थ है।


 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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