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खाने-पीने की चीजों में भारी मिलावट, 5 में से 1 सैंपल फेल, 4,800 लोगों को सजा, ₹257 करोड़ का जुर्माना

नई दिल्ली: देश में खाने-पीने की चीजों में मिलावट की खबरें जब-तब आती रहती हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच साल में खाने-पीने की चीजों के जितने भी सैंपल की जांच हुई है, उनमें हर पांच में से एक में मिलावट सामने आई है। राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच सालों में 1.7 लाख से ज्यादा खाने के सैंपल असुरक्षित पाए गए। मिलावटखोरों पर 257 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना भी लगाया गया है।स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि   कानूनों को लागू करने के लिए अब ज्यादा सख्ती बरती जा रही है। खास तौर पर उन खाने-पीने की चीजों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें मिलावट का खतरा ज्यादा होता है। इनमें दूध और दूध से बने उत्पाद और रेडी टु ईट फूड्स शामिल हैं। ये चीजें शहरों में खूब बिकती हैं। आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच साल में पूरे देश में करीब 8.7 लाख फूड सैंपल की जांच की गई। इनमें से 1.74 लाख से ज्यादा सैंपल सुरक्षा और गुणवत्ता के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे।

रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम

इन गड़बड़ियों के कारण लगभग 4,800 लोगों को सजा हुई और उन पर भारी जुर्माना लगाया गया। सिर्फ इस साल की बात करें तो अब तक 1.7 लाख सैंपल जांचे गए हैं, जिनमें से 34,000 से ज्यादा सैंपल सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर पाए। मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि फूड सिक्योरिटी सुनिश्चित करना केंद्र और राज्यों दोनों की जिम्मेदारी है। अब ‘रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम’ के जरिए ज्यादा से ज्यादा गड़बड़ियां पकड़ी जा रही हैं। इस सिस्टम में     करने वाले बिजनेस के जोखिम के स्तर के आधार पर जांच की जाती है।

क्योंकि वहां खाने की मांग ज्यादा होती है और सप्लाई चेन भी काफी जटिल होती है। सरकार का कहना है कि बड़ी संख्या में गड़बड़ियों का पकड़ा जाना इस बात का सबूत है कि निगरानी मजबूत हुई है, न कि नियमों को लागू करने में कोई कमी आई है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और पौष्टिक खाना पहुंचे, इसके लिए मिलकर काम जारी रहेगा।

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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