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दवा बेचते-बेचते पता चली असली कमाई वाली बात… नौकरी छोड़ शुरू किया काम, अब 1.5 करोड़ का टर्नओवर

नई दिल्‍ली: कानपुर देहात के शिवराज निषाद ने सूखे फूलों (ड्राई फ्लावर) के व्यवसाय में अलग पहचान बनाई है। फार्मा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की जमी-जमाई नौकरी छोड़कर उन्‍होंने इस कारोबार में कदम रखा। उन्‍होंने कानपुर में फूलों की खेती को सफल ड्राई फ्लावर बिजनेस में बदल दिया है। वह M.Pharma हैं। उन्होंने हेल्‍थ और वेलनेस इंडस्‍ट्री में बढ़ते रुझान को सही समय पहचाना। शिवराज ने महसूस किया कि काफी लोग दवाओं के बजाय इम्यूनिटी-बूस्टिंग फ्लावर टी की ओर रुख कर रहे थे। उन्‍होंने यह भी पाया कि स्थानीय बाजारों में फूलों की कम मांग के कारण किसानों को भारी नुकसान होता है। इस समस्या को हल करने और किसानों को स्थिर आय देने के उद्देश्य से उन्होंने 2021 में ‘ईश्वर फ्लावर्स एंड हर्ब्स’ की नींव रखकर सूखे फूलों का कारोबार शुरू किया। इसका सालाना टर्नओवर आज 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। आइए, यहां श‍िवराज न‍िषाद की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।

शिवराज निषाद ने कानपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड फार्मेसी से M.Pharma की डिग्री पूरी की। जुलाई 2017 में उन्‍होंने एक फार्मा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में नौकरी शुरू की। नौकरी के दौरान उन्होंने देखा कि लोग तेजी से इम्यूनिटी बनाने और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए गोलियों के बजाय फ्लावर टी जैसे हर्बल विकल्पों को अपना रहे थे। उन्हें याद आया कि उनके परिवार की शेखपुर, कानपुर देहात में गुलाब, गेंदा और चमेली की फूलों की खेती थी। चार साल बाद उन्होंने महसूस किया कि बाजार में ताजा फूलों की मांग अस्थिर थी। इसका मूल्य 10 रुपये से 100 रुपये प्रति किलो के बीच झूलता रहता था। इससे किसानों को नुकसान होता था। कोरोना लॉकडाउन के दौरान मिले खाली समय ने उन्हें चिंतन करने का मौका दिया। वह किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलवाने के लिए सूखे फूल बेचने का समाधान लेकर आए।शिवराज ने फरवरी 2021 में अपनी कंपनी ‘ईश्वर फ्लावर्स एंड हर्ब्स’ को रजिस्‍टर किया। उन्होंने जल्द ही यह जान लिया कि सूखे फूलों की कॉस्मेटिक, वेलनेस और फार्मास्युटिकल कंपनियों में बहुत बड़ी मांग है। ये उत्पाद इम्यूनिटी-बूस्टिंग और तनाव-मुक्त करने वाले गुणों के कारण विश्व स्तर पर लोकप्रिय हो रहे थे। भारत से ब्रिटेन, अमेरिका और मलेशिया जैसे 20 देशों में सूखे फूलों का निर्यात होता है। उन्होंने अपने परिवार की आधा एकड़ जमीन पर बटरफ्लाई पी (अपराजिता) की खेती से शुरुआत की। साथ ही सूखे फूलों के मूल्य निर्धारण, खरीदारों और व्यापारियों पर गहन शोध किया। एक नमूना भेजने पर उन्हें 12 किलो फूलों का पहला ऑर्डर मिला। इसके बाद उन्होंने आसपास के किसानों के साथ गठजोड़ करना शुरू कर दिया ताकि वे भी बाजार की अस्थिरता से बचकर एक स्थिर आय कमा सकें।आज शिवराज निषाद कानपुर, सीतापुर, रायबरेली और हमीरपुर सहित कई जिलों में फूल उगाने वाले 1,000 किसानों के साथ काम करते हैं। वह मुख्य रूप से हेल्‍थ और पर्सनल केयर कंपनियों को प्रति माह चार से पांच टन (4,000 से 5,000 किलो) सूखे फूल बेचते हैं। सूखे गेंदे और गुलाब का मूल्य 200 रुपये से 300 रुपये प्रति किलो होता है। जबकि नीले कोरल फूल का मूल्य 2,500 रुपये से 3,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है। उनकी कंपनी का वार्षिक टर्नओवर लगभग 1.5 करोड़ रुपये है। हालांकि, मौसम और त्योहारों के दौरान ताजा फूलों की मांग से मासिक आय (10 लाख रुपये से 25 लाख रुपये) में उतार-चढ़ाव आता है। शिवराज की सबसे बड़ी उपलब्‍ध‍ि यह है कि उनके प्रयासों से किसान अब बाजार की दया पर निर्भर नहीं हैं। शेखपुर अब उत्तर प्रदेश में सूखे फूलों के व्यवसाय का केंद्र बन चुका है।लागत को कम रखने के लिए शिवराज ने एक सस्ता समाधान अपनाया। उन्होंने अपनी छत पर मात्र 60,000 रुपये की लागत से एक कस्टमाइज्ड सोलर ड्रायर स्थापित किया। वहीं, बाजार में इसकी कीमत 3 लाख रुपये तक होती है। यह सोलर ड्रायर सुखाने के समय को कम करता है। 2023 में उन्होंने 1.25 लाख की लागत से 700 किलो फूल प्रतिदिन सुखाने की क्षमता वाला एक और ड्रायर बनवाया। अपने सूखे फूलों के साथ उन्होंने ‘ब्लूवेदा’ नाम से अपना फ्लावर टी ब्रांड भी लॉन्च किया है। भविष्य में शिवराज फूलों के साथ सब्जी और फल सुखाने के व्यवसाय में भी कदम रखने की योजना बना रहे हैं। उनका मानना है कि भारत में मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण एग्री-ड्राइंग में अपार संभावनाएं हैं।

 

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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