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निगम की अनदेखी से यमुनापार के कई इलाकों में ढाबों पर कोयला व लकड़ी से सुलग रही भट्टियां

पूर्वी दिल्ली। प्रदूषण लोगों का दम घोंट रहा है। ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के तहत पाबंदियां लागू हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका पालन होता नहीं दिख रहा। यमुनापार के कई इलाकों में अब भी ढाबों पर कोयला और लकड़ी से भट्टी जलाकर खाना पकाया जा रहा है, जिससे प्रदूषण बढ़ने का खतरा बना हुआ है।सोमवार को नंद नगरी इलाके में सड़क किनारे एक ढाबे पर खुलेआम लकड़ी की भट्टी में सब्जियां पकाई जा रही थीं। वहीं गुरु अंगद नगर के पास ढाबे में कोयले की भट्टी पर रोटियां और नान सेंकने का काम होता देखा गया। भजनपुरा क्षेत्र में भी कई जगहों पर ढाबे लकड़ी और कोयले की भट्टियां जलाते नजर आए।

इन भट्टियों से निकलने वाला घना धुआं न सिर्फ हवा को दूषित कर रहा है, बल्कि आसपास के लोगों के लिए सांस लेना भी मुश्किल बना रहा है। खुरेजी, कल्याणपुरी, त्रिलोकपुरी और करावल नगर रोड पर इस तरह की भट्टियां उपयोग में लाई जा रही हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में कोयला और लकड़ी जलाने से निकलने वाला धुआं हवा में मौजूद प्रदूषक कणों की मात्रा को तेजी से बढ़ा देता है।

यही कारण है कि दिल्ली की हवा जहरीली होती जा रही है। नगर निगम की जिम्मेदारी है कि वह इन ढाबों पर सख्त कार्रवाई करे, लेकिन हालात बताते हैं कि निगरानी और प्रवर्तन में भारी ढिलाई बरती जा रही है। ढाबा संचालक बिना किसी डर के कोयला और लकड़ी का इस्तेमाल जारी रखे हुए हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि धुआं स्पष्ट रूप से नजर आता है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करता। निगम अधिकारियों ने बताया कि वह जांच करेंगे और जिन ढाबों पर कोयले और लकड़ी से भट्टियां सुलगाई जा रही हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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