शिक्षा और स्वास्थ

अंडे के छिलके पौधों में कैसे डालें? पौधों के लिए बनाएं कैल्शियम वाली लिक्विड खाद

अंडे न सिर्फ शरीर के लिए अच्छे हैं, बल्कि पौधों के लिए भी बहुत अच्छे होते हैं. अक्सर लोग अंडे खाने के बाद उसके छिलकों को बेकार समझ कर कूड़ेदान में फेंक देते हैं, लेकिन ये छिलके भी बहुत काम के साबित हो सकते हैं. अंडे के छिलके पौधे की ग्रोथ के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. अंडे के छिलकों में कैल्शियम अच्छी मात्रा में होता है, जो पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों में से एक है. यूट्यूब पर @terracegardening नाम के चैनल पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें अंडे के छिलके से पौधों के लिए कैल्शियम वाली लिक्विड खाद बनाने का तरीका बताया है.

पौधों में अंडे के छिलके कैसे डालें?

अंडे के छिलके मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट से बने होते हैं. कैल्शियम पौधों की कोशिकाओं को मजबूत बनाने और उनकी ग्रोथ के लिए मदद करता है. अगर, पौधे में कैल्शियम की कमी हो जाए, तो पौधों की बढ़वार धीमी पड़ सकती है और नई पत्तियां कम निकल सकती हैं. हालांकि, छिलकों को सीधे मिट्टी में डालने से तुरंत फायदा नहीं मिलता. ऐसे में अंडे के छिलके और सिरके की मदद से लिक्विड खाद बनाई जा सकती है.

अंडे के छिलकों को पीसकर सीधा मिट्टी में डालें

अंडे के छिलकों को पीसकर सीधा मिट्टी में डाल देने से आपके पौधे हरे-भरे और फलों से नहीं लद जाते हैं. हालांकि, इस तरीके में छिलकों को पूरी तरह गलने और कैल्शियम छोड़ने में 6 महीने से लेकर 1 साल तक का समय लग सकता है. इसलिए यह धीमा लेकिन प्रभावी तरीका माना जाता है.

अंडे के छिलकों से लिक्विड खाद कैसे बनाएं?

अंडे कि छिलकों से लिक्विड खाद बनाने के लिए उन्हें सिरके में भिगोना होता है. सिरका छिलके के साथ रिएक्शन करता है, जिससे इसमें बुलबुले और झाग बनने लगते हैं.  कुछ समय बाद अंडे का छिलके सॉफ्ट होकर टूटने लगते हैं और उसमें मौजूद कैल्शियम का कुछ हिस्सा सिरके में मिल जाता है. जब घोल डालना हो तो उसे पानी में मिलाकर यानी पतला करके पौधों में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे बनाने के लिए अंडे के छिलकों को हल्का तोड़ लें या छोटे टुकड़ों में कर लें. अब इन्हें एक कांच के जार में डालें. इसके बाद जार में उतना सिरका डालें कि छिलके अच्छी तरह उसमें डूब जाएं. सिरका डालते ही बुलबुले और झाग बनने लगेंगे, जो बिल्कुल नॉर्मल है. मिश्रण को करीब 48 घंटे के लिए रखा जा सकता है. इस दौरान छिलके धीरे-धीरे टूटेंगे और उनका कैल्शियम घोल में आने लगेगा.

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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