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बेटे गुजर गए, पोते पर भरोसा नहीं; जबलपुर के सुखराम ने गयाजी आकर खुद का पिंडदान कर दिया

गयाजी। आमतौर पर पूर्वजों की मोक्ष की कामना के लिए गयाजी आकर संतानें पिंडदान करती हैं। बिहार के गयाजी में पिछले 13 दिनों से चल रहे पितृपक्ष मेले में लाखों तीर्थ यात्री पिंडदान कर अपने पितरों की मोक्ष की कामना कर चुके हैं। मगर बुधवार को यहां एक अजीब सा नजारा देखने को मिला। एक व्यक्ति ने अपने पूर्वजों के लिए नहीं, बल्कि खुद के लिए ही गया श्राद्ध कर दिया। शक्तिपीठ मां मंगलागौरी मंदिर परिसर में पहाड़ी के ऊपर स्थित प्राचीन जनार्दन मंदिर में मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले 65 वर्षीय सुखराम केवट अपनी पत्नी चमारी बाई केवट के साथ पिंडदान करने पहुंचे।उन्होंने भगवान के पास अग्रिम (एडवांस) के रूप में तीन पिंड अर्पित किए। पिंडदान कर सुखराम केवट ने भगवान जनार्दन से अपनी और पत्नी की मौत के बाद अग्रिम रखे पिंड को स्वीकार मोक्ष की कामना की। लाखों पिंडदान में गया श्राद्ध का यह नजारा सबसे जुदा और बेहद मार्मिक रहा।

पोता तो है, लेकिन उस पर भरोसा नहीं

पिंडदान के बीच पूछने पर सुखराम केवट ने बताया कि उनके दो बेटे थे। एक की मौत बचपन में और दूसरी की शादी के बाद हो गई। बड़े बेटे स्व. टुकेश्वर केवट का पुत्र है। लेकिन, उन्हें भरोसा नहीं है कि उनका पोता गयाजी आकर उन दोनों के लिए पिंडदान करेगा। इसलिए स्वस्थ रहते पितृपक्ष में गयाजी आकर उन्होंने खुद के लिए पिंडदान कर दिया।

शास्त्रों में है आत्म पिंडदान का विधान

पिंडदान कर रहे आचार्य विकास पांडेय ने बताया कि शास्त्रों में स्व (आत्म) पिंडदान वर्णित है। उसके लिए आज की तिथि यानी आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी सर्वोत्तम है। यही वजह है कि जबलपुर के सुखराम केवट ने पत्नी के साथ आत्म पिंडदान किया।

आचार्य ने बताया कि सुखराम ने चावल और दही के तीन पिंड बनाकर पिंडदान का पूरा विधान किया। फिर तीन पिंड भगवान जनार्दन के चरणों में अर्पित कर दंपति तीर्थयात्री ने अपनी मौत के बाद मोक्ष मिल जाने की कामना की। मां मंगलागौरी मंदिर के पुजारी चंद्रधर गिरि ने बताया कि पूरे गयाजी में बस जनार्दन मंदिर में ही आत्म पिंडदान का विधान है।

शास्त्र पढ़ने के बाद आत्म पिंडदान की मिली जानकारी

सुखराम केवट ने बताया कि वे जबलपुर शहर के रहने वाले हैं

से रिटायर्ड होने के बाद वे अपनी पत्नी के साथ अपने मकान में रह रहे हैं। धार्मिक आस्था वाले सुखराम ने बताया कि शास्त्र गरुड़ पुराण और भागवत महापुराण उन्होंने पढ़ी है। शास्त्र पढ़कर ही गयाजी में आत्म पिंडदान की जानकारी मिली। इसके बाद पितृपक्ष में मंगलवार को गयाजी आए और बुधवार को खुद का पिंडदान किया।

 

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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