साल्हावास। खेल के मैदान में देश का मस्तक ऊंचा करने वाली ओलिंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर ने बुधवार को अपनी दादी दया कौर (84) को अंतिम विदाई देते हुए एक ऐसी भावुक और अनूठी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।ग्रामीण अंचल की पुरानी सामाजिक मान्यताओं से परे जाकर मनु भाकर ने स्वयं अपनी दादी के पार्थिव शरीर को कंधा दिया। क्षेत्र में यह पहला ऐसा क्षण था, जब किसी पौत्री ने अपनी दादी की अंतिम यात्रा में कांधा देकर दादी-पोती के पवित्र और निश्छल प्रेम की अमिट मिसाल कायम की।दरअसल, अपनी दादी के निधन का समाचार मिलते ही मनु भाकर भोपाल में अपना ट्रेनिंग कैंप बीच में ही छोड़कर तुरंत अपने पैतृक गांव गोरिया पहुंचीं। गांव में जब उनकी दादी की अंतिम यात्रा निकली, तो पूरा भाकर परिवार और गांव का हर नागरिक इस भावुक पल का साक्षी बना।
टीवी पर मुकाबला देख खुशी से रो पड़ी थीं दादी
84 वर्षीय दया कौर का मंगलवार को रोहतक के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया था। दया कौर का अपनी पोती मनु के साथ एक अटूट और गहरा भावनात्मक लगाव था।
पेरिस ओलिंपिक के दौरान जब मनु भाकर इतिहास रच रही थीं, तब उनकी दादी ने गांव में बैठकर टीवी पर पूरा मुकाबला देखा था और पोती की ऐतिहासिक सफलता पर भावविभोर हो गई थीं। मनु की हर जीत पर पूरे गांव में खुशी जताने वाली दादी का अचानक चले जाना परिवार के लिए एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसकी भरपाई असंभव है।
पीछे छोड़ गईं भरा-पूरा परिवार
दिवंगत दया कौर अपने पीछे एक विशाल और हंसता-खेलता परिवार छोड़ गई हैं। उनके बेटों में प्रताप सिंह, इंद्र सिंह, बलजीत सिंह, रामकिशन भाकर (मनु के पिता) और महेंद्र सिंह तथा एक बेटी सहित 15 पौत्र व पौत्रियों का भरा-पूरा परिवार इस दुख की घड़ी में एकजुट नजर आया।
अंतिम संस्कार में गोरिया और आसपास के अनेक गांवों से पहुंचे सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से स्वर्गीय दया कौर को श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।




