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विलुप्त होती प्रजाति को बचाने की कोशिश, असम से छत्तीसगढ़ लाई जाएंगी जंगली भैंसे

छत्तीसगढ़ सरकार अब राज्य में विलुप्त हो रही जंगली भैंसों को बचाने की कोशिश में लग गयी है। पिछले कुछ दशकों में जंगली भैंसों की आबादी में भारी गिरावट हो रही है। इसे देखते हुए, छत्तीसगढ़ वन विभाग असम से जंगली भैंसों को स्थानांतरित करने और उन्हें पामेड वन्यजीव अभ्यारण्य, उदंती सीतानदी बाघ अभ्यारण्य और इंद्रावती बाघ अभ्यारण्य (आईटीआर) में बाड़ों में रखने की योजना बना रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे उनकी आबादी को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने में मदद मिलेगी।

छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) अरुण कुमार पांडे ने कहा कि जल्द ही केंद्र को एक प्रस्ताव भेजा जाएगा। एशियाई जंगली भैंस दुनिया का सबसे बड़ा जंगली पशु है। भारत में दुनिया के जंगली जल भैंसों की आबादी का 90% से अधिक हिस्सा (3500-3700 भैंसें) पाया जाता है जिनमें से अधिकांश असम (3000-3500) में हैं। साथ ही मेघालय, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कोलामार्का जंगलों में भी ये पाए जाते हैं। संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए 2016 की आईयूसीएन रेड लिस्ट में इसे ‘लुप्तप्राय’ श्रेणी में रखा गया है।

विलुप्त हो रही जंगली भैंसे

कभी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड और मध्य भारत के तेलंगाना में पाई जाने वाली यह भैंस आज छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र तक ही सीमित है। भारत में जंगली भैंस को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त है। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) की 2005 की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि यूएसटीआर, इंद्रावती टाइगर रिजर्व (आईटीआर) और बीजापुर जिले के पामेड में 39-47 जंगली भैंसें थीं लेकिन अधिकारियों का अनुमान है कि इनकी संख्या घटकर 12-16 रह गई है।

वन विभाग ने भैंसों की आबादी बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं। 2015 में, वन विभाग ने क्लोन की गई मादा जंगली भैंस दीपाशा पर अपनी उम्मीदें टिकाई थीं। हालांकि, बाद में इस प्रयास को छोड़ दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि नयी योजना के तहत असम से जंगली भैंसों को लाकर पामेड वन्यजीव अभ्यारण्य, यूएसटीआर और इंद्रावती में बाड़ों में रखा जाएगा। यह प्रयोग पहले ही सफलतापूर्वक किया जा चुका है। पिछले कुछ वर्षों में असम से 6 जंगली भैंसों को बरनावापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में लाया गया। साल 2020 में एक नर और एक मादा और 2023 में चार मादा भेंसे लाई गईं जिससे वहां भैंसों की संख्या 11 हो गई।

जानवरों की गतिविधियों पर रखी जाएगी नजर

बलोदा बाजार के डीएफओ गणवीर धम्मशील ने कहा, “उनके आहार की निगरानी करने और मानवीय हस्तक्षेप को कम से कम करने के लिए डॉक्टरों और कर्मचारियों की एक समर्पित टीम की आवश्यकता है।” यूएसटीआर में पहले से ही एक नर भैंस मौजूद है, ऐसे में यूएसटीआर के उप निदेशक वरुण जैन ने बताया कि तीन मादा भैंसों को स्थानांतरित करने की योजना है लेकिन चूंकि अकेला नर भैंस बूढ़ा हो रहा है, इसलिए इसके सफल होने के बारे में ज्यादा नहीं कहा जा सकता।

एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उन्हें रेडियो कॉलर पहनाए जाएंगे। यूएसटीआर के मुख्य क्षेत्र में स्थित 17 गांवों ने उन्हें छोड़ने पर सहमति जताई है। अगर यह प्रयास विफल रहता है तो हम कृत्रिम गर्भाधान का सहारा लेंगे।”

यह भी पढ़ें: टाइगर कॉरिडोर में रेलवे लाइन को मिली हरी झंडी

देश में एक टाइगर कॉरिडोर के बीच रेलवे लाइन को हरी झंडी मिल गई है। नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (SC-NBWL) की स्टैंडिंग कमिटी ने मध्य प्रदेश में जुझारपुर और चिचोंडा के बीच तीसरी रेलवे लाइन के लिए वाइल्डलाइफ क्लीयरेंस की सिफारिश की है

Manoj Mishra

Editor in Chief

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