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10वीं और 12वीं में फेल होने पर भी नहीं मानी हार, कड़ी मेहनत से IAS बन रचा इतिहास

अक्सर कहा जाता है कि असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी होती है। इस कहावत को सच साबित किया है गुजरात कैडर की वरिष्ठ IAS अधिकारी अंजू शर्मा ने। 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में असफल होने वाली अंजू ने हार नहीं मानी और अपनी कमजोरियों को ताकत बनाकर देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली।

10वीं और 12वीं में मिली असफलता

अंजू शर्मा का शुरुआती शैक्षणिक सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने खुलकर स्वीकार किया है कि 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। 12वीं में उन्हें अर्थशास्त्र (इकोनॉमिक्स) विषय में असफलता का सामना करना पड़ा, जबकि 10वीं की प्री-बोर्ड परीक्षा भी उनके लिए बड़ी चुनौती साबित हुई। इन असफलताओं ने उनके आत्मविश्वास को जरूर झटका दिया, लेकिन उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया।

मां बनीं सबसे बड़ी ताकत

मुश्किल समय में अंजू शर्मा को उनकी मां का पूरा सहयोग और प्रोत्साहन मिला। मां ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने और असफलताओं से सीख लेने की प्रेरणा दी। यही समर्थन उनके लिए उम्मीद की किरण बना और उन्होंने नई ऊर्जा के साथ अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया।

कॉलेज में बनीं गोल्ड मेडलिस्ट

 

स्कूल के दिनों की असफलताओं से सबक लेते हुए अंजू ने कॉलेज में कड़ी मेहनत की। उन्होंने बीएससी और एमबीए की पढ़ाई पूरी की और अपनी मेहनत के दम पर कॉलेज में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का सपना देखा और UPSC की तैयारी शुरू कर दी।

22 साल की उम्र में पहले प्रयास में बनीं IAS

अंजू शर्मा ने महज 22 साल की उम्र में पहली ही कोशिश में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। इस शानदार सफलता के साथ वह गुजरात कैडर की IAS अधिकारी बन गईं। उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि यदि व्यक्ति में दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और सही दिशा में काम करने का जज्बा हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

प्रशासनिक सेवा में शानदार करियर

IAS बनने के बाद अंजू शर्मा ने वर्ष 1991 में राजकोट में असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काम किया, जिनमें गांधीनगर की कलेक्टर का पद भी शामिल है। अपने लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।

युवाओं के लिए बड़ा संदेश

अंजू शर्मा की कहानी यह सिखाती है कि परीक्षा में असफल होना जिंदगी की हार नहीं है। असफलताएं हमें अपनी कमियों को समझने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर देती हैं। उनकी सफलता उन छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो किसी परीक्षा में असफल होने के बाद निराश हो जाते हैं। अंजू शर्मा ने साबित कर दिया कि यदि हौसला बुलंद हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो असफलता भी एक दिन सफलता की नींव बन जाती है।

 

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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