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छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सर्जरी: 5 जिलों की कमान महिला कलेक्टरों को, निहारिका बारीक गृह सचिव, 42 IAS का तबादला

देश में महिला आरक्षण को लेकर सियासी बहस तेज है, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा और व्यावहारिक संदेश दिया है. बुधवार शाम जारी आईएएस तबादला सूची में राज्य सरकार ने एक साथ पाँच जिलों की कमान महिला आईएएस अधिकारियों को सौंपी है. खास बात यह है कि ये जिले सरगुजा और बिलासपुर संभाग के पिछड़े और अति पिछड़े क्षेत्र हैं. इसके साथ ही कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष के हमलों के बीच गृह विभाग की जिम्मेदारी भी सीनियर महिला आईएएस निहारिका बारीक को दी गई है. यह फैसला महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने के साथ प्रशासनिक कसावट का संकेत माना जा रहा है.

42 आईएएस के तबादले, महिला अधिकारियों पर सरकार का भरोसा

राज्य सरकार ने प्रशासनिक कसावट के तहत बुधवार को 42 आईएएस और एक आईएफएस अधिकारी की नई पदस्थापना सूची जारी की. इस सूची में सबसे अहम निर्णय यह रहा कि विकास की दृष्टि से पिछड़े और अति पिछड़े जिलों की जिम्मेदारी महिला आईएएस अधिकारियों को सौंपी गई. सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में प्रशासनिक सक्रियता और संवेदनशील नेतृत्व की जरूरत है, जिसे महिला अधिकारी बेहतर ढंग से निभा सकती हैं.

सरगुजा-बिलासपुर संभाग में महिला कलेक्टर

तबादला सूची के अनुसार सरगुजा संभाग के चार और बिलासपुर संभाग के एक जिले में महिला आईएएस को कलेक्टर नियुक्त किया गया है.

  • कोरिया जिले की कमान 2012 बैच की आईएएस पुष्पा साहू को सौंपी गई है.
  • बलरामपुर-रामानुजगंज की जिम्मेदारी 2016 बैच की आईएएस चंदन संजय त्रिपाठी को दी गई है.
  • एमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले का कलेक्टर 2016 बैच की संतन देवी जांगड़े को बनाया गया है.
  • सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की कमान 2016 बैच की आईएएस पद्मिनी भोई साहू को मिली है.
  • सूरजपुर जिले में 2019 बैच की आईएएस रेना जमील को कलेक्टर नियुक्त किया गया है.

कानून व्यवस्था की चाबी निहारिका बारीक के हाथ

प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर सवाल उठा रही है. इन आरोपों के बीच सरकार ने बड़ा दांव खेलते हुए गृह विभाग की जिम्मेदारी सीनियर महिला आईएएस निहारिका बारीक को सौंपी है. उन्हें गृह सचिव बनाया गया है. निहारिका बारीक की गिनती सख्त और ईमानदार अधिकारियों में होती है और उनकी प्रशासनिक पकड़ को देखते हुए यह फैसला अहम माना जा रहा है.

महिला नेतृत्व से विकास और कसावट की उम्मीद

प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ ज़मीनी शासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम माना जा रहा है. पिछड़े इलाकों में महिला कलेक्टरों की तैनाती और गृह विभाग में महिला अफसर को जिम्मेदारी देकर सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अब प्रशासन में परिणाम और भरोसे को प्राथमिकता दी जाएगी.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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