- रोजमर्रा की थाली में स्वाद बढ़ाने वाला नमक अब सिर्फ सेहत नहीं, बल्कि यादों के लिए भी खतरे की घंटी बनता दिख रहा है। एक नई रिसर्च में संकेत मिला है कि जरूरत से ज्यादा सोडियम का सेवन, खासकर पुरुषों में, दिमाग की उस क्षमता को कमजोर कर सकता है जो रोजमर्रा की छोटी-छोटी घटनाओं और यादों को संजोती है।
- रिसर्च के अनुसार अधिक सोडियम का सेवन खासकर पुरुषों में एपिसोडिक मेमोरी यानी रोजमर्रा की छोटी-छोटी यादों को कमजोर कर सकता है, जिसका संबंध दिमाग तक रक्त प्रवाह में कमी, सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जोड़ा गया है।
- गौरतलब है कि भारत सहित दुनिया भर में लोग पहले ही तय सीमा से अधिक नमक खा रहे हैं, जिससे हाइपरटेंशन और अन्य बीमारियों के साथ-साथ संभावित रूप से याददाश्त पर भी खतरा बढ़ रहा है।
- संदेश साफ है कि स्वाद के लिए बढ़ाया गया नमक धीरे-धीरे यादों को धुंधला कर सकता है, इसलिए संतुलित सेवन ही सुरक्षित भविष्य की कुंजी है।
हम सभी हर दिन नमक खाते हैं, कभी स्वाद, कभी आदत में…, बिना यह सोचे कि इसका असर कितना गहरा हो सकता है। आज पैकेट बंद स्नैक्स से लेकर बाहर खाने तक, हर जगह खामोशी से हमारी थाली में अपनी जगह बनाए रखता है।
लेकिन अब एक नई स्टडी ने इसके जरुरत से ज्यादा सेवन को लेकर चेताया है कि यह आम-सा दिखने वाला हमारी याददाश्त को धीरे-धीरे धुंधला कर सकता है, और इसका असर पुरुषों में कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता है।
इस बारे में एडिथ कोवान यूनिवर्सिटी (ईसीयू) और मेलबर्न विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिकों ने अपनी नई स्टडी में खुलासा किया है कि तय मात्रा से अधिक सोडियम यानी लेने से एपिसोडिक मेमोरी, यानी रोजमर्रा की यादें जैसे गाड़ी कहां पार्क की, या जीवन के खास पल तेजी से कमजोर हो सकती हैं।
बता दें कि इस अध्ययन में 1,200 से अधिक लोग शामिल थे, जिनकी शुरुआत में याददाश्त सामान्य थी। करीब छह वर्षों तक उनके खान-पान और दिमागी क्षमता पर नजर रखी गई। इस दौरान उनकी याददाश्त, ध्यान, भाषा और सोचने-समझने की क्षमता का बार-बार परीक्षण किया गया।
स्वाद का जाल, यादों पर वार
पहली नजर में इस जांच के नतीजे सामान्य ही लगे, पूरे समूह में और दिमागी गिरावट के बीच कोई सीधा, स्पष्ट संबंध नहीं दिखा। लेकिन जब वैज्ञानिकों ने आंकड़ों को गहराई से खंगाला, तो तस्वीर बदलती नजर आई।
अध्ययन से पता चला कि जिन पुरुषों ने तय सीमा से अधिक का सेवन किया था, उनकी एपिसोडिक मेमोरी यानी रोजमर्रा की छोटी-छोटी यादें, जैसे बातचीत, घटनाएं या चीजें कहां रखी है, तेजी से कमजोर होती दिखी। वहीं हैरानी की बात है कि महिलाओं में ऐसा कोई स्पष्ट असर सामने नहीं आया।
अध्ययन से जुड़ी विशेषज्ञ डॉक्टर सामंथा गार्डनर के मुताबिक, ज्यादा नमक लेने वाले पुरुषों में ब्लड प्रेशर भी अधिक पाया गया। ये दोनों चीजें दिमाग तक जाने वाली रक्त-नलिकाओं पर दबाव डालती हैं। इसकी वजह से दिमाग तक रक्त की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
क्यों पुरुष बन रहे हैं ज्यादा शिकार?
वैज्ञानिकों के अनुसार दिमाग का एक हिस्सा, ‘हिप्पोकैम्पस’, जो यादों और सीखने-समझने के लिए बेहद अहम है, ऐसे बदलावों के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। जब रक्त प्रवाह कम होता है, तो सबसे पहले यहीं असर दिख सकता है।
दिलचस्प बात ये है कि ब्लड प्रेशर को ध्यान में रखने के बाद भी के बीच संबंध बना रहा। इससे संकेत मिलता है कि कहानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती।
विशेषज्ञों का मानना है कि, ज्यादा दिमाग में सूजन को बढ़ा सकता है, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा कर सकता है और दिमाग की सुरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है। ये सब मिलकर लंबे समय में दिमाग की कार्यक्षमता और याददाश्त को धीरे-धीरे दबे पांव नुकसान पहुंचा सकते हैं।
धीरे-धीरे घटता ब्लड फ्लो, कमजोर होती यादें
एपिसोडिक मेमोरी अक्सर अल्जाइमर के शुरुआती संकेतों में शामिल होती है। ऐसे में यह नतीजे भविष्य की एक चेतावनी की तरह हैं। हालांकि, वैज्ञानिक साफ कहते हैं, यह सीधा कारण नहीं, बल्कि एक संभावित संबंध है। और भी कई कारण मिलकर दिमागी सेहत को प्रभावित करते हैं।





