मिर्जापुर: मिठाई का नाम सुनते ही अक्सर लोग अपनी पसंदीदा बर्फी को याद करते हैं, लेकिन शुगर और सेहत की चिंता के चलते बहुत से लोग चाहकर भी मिठाई से दूरी बना लेते हैं. मिठाई खाने का मन तो करता है, लेकिन मजबूरी में मुंह मोड़ना पड़ता है. मिर्जापुर में इसी परेशानी को समझते हुए एक बेटे ने अपने पिता के लिए ऐसा प्रयोग किया, जो आज सैकड़ों लोगों की पसंद बन चुका है. गुड़ से बनी बर्फी अब सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि सेहत और स्वाद का भरोसा बन गई है.
कछवां की पुरानी दुकान में मिल रही खास बर्फी
मिर्जापुर जिले के कछवां इलाके में स्थित श्रीजी मिष्ठान भंडार इलाके की पुरानी और भरोसेमंद मिठाई की दुकान मानी जाती है. यह दुकान कई सालों से लोगों की पसंद रही है. हालांकि साल 2018 से इस दुकान की पहचान गुड़ की बर्फी से बनने लगी. धीरे-धीरे इस मिठाई की चर्चा कछवां से निकलकर आसपास के इलाकों तक पहुंच गई. आज स्थिति यह है कि लोग खासतौर पर गुड़ की बर्फी खरीदने के लिए इस दुकान तक पहुंचते हैं.
पिता की बीमारी से निकला अनोखा आइडिया
श्रीजी मिष्ठान भंडार के संचालक भानु प्रताप सिंह बताते हैं कि साल 2018 में उनके पिता गंभीर रूप से बीमार पड़े थे और उन्हें शुगर की समस्या थी. डॉक्टरों ने मीठा खाने से साफ मना कर दिया था. घर में मिठाई बनती थी, लेकिन पिता उसे खा नहीं पाते थे. यही बात बेटे के मन में खटकती रही. इसी दौरान उनके मन में कम शुगर वाली मिठाई बनाने का विचार आया. गुड़ को शक्कर की तुलना में बेहतर माना जाता है, इसलिए उन्होंने गुड़ से बर्फी बनाने की ठानी
बार-बार असफलता के बाद मिली सफलता
भानु प्रताप सिंह बताते हैं कि गुड़ की बर्फी बनाना उतना आसान नहीं था, जितना उन्होंने सोचा था. कई बार बर्फी चाशनी में सही नहीं उतर पाई. कभी बर्फी सख्त हो जाती थी तो कभी बिखर जाती थी. इस दौरान काफी नुकसान भी उठाना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार कोशिश के बाद एक दिन गुड़ की बर्फी बिल्कुल सही चाशनी में उतरी. स्वाद भी शानदार था और बनावट भी बेहतरीन निकली.
पिता की सहमति से शुरू हुई बिक्री
पहली बार जब यह बर्फी सही बनी, तो सबसे पहले इसे उनके पिता ने चखा. पिता को इसका स्वाद पसंद आया और उन्होंने इसे दुकान पर बेचने की सलाह दी. पिता की सहमति के बाद गुड़ की बर्फी को दुकान में बिक्री के लिए रखा गया. शुरुआत में ग्राहक कम थे, लेकिन धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ने लगी. जो भी ग्राहक एक बार इसे
खोया, गुड़ और इलायची से होती है बर्फी तैयार
गुड़ की बर्फी बनाने में मुख्य रूप से खोया, शुद्ध गुड़ और इलायची का इस्तेमाल किया जाता है. खोया और गुड़ के मेल से बर्फी की गुणवत्ता बेहतर हो जाती है और इसकी उम्र भी बढ़ जाती है. इलायची इसकी खुशबू और स्वाद को और खास बना देती है. दुकानदार का कहना है कि इस बर्फी में किसी तरह का केमिकल या मिलावट नहीं की जाती.
भानु प्रताप सिंह बताते हैं कि गुड़ की बर्फी की कीमत खोया के बाजार भाव पर निर्भर करती है. सामान्य दिनों में इसकी कीमत कम रहती है, लेकिन शादी-ब्याह के सीजन में दाम बढ़ जाते हैं. शादी के मौसम में इसकी कीमत 360 से 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है. इसके बावजूद ग्राहकों की संख्या कम नहीं होती.
दूर-दूर से लोग आते हैं लोग बर्फी खरीदने
गुड़ की बर्फी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग कछवां पहुंचते हैं. आम लोगों के अलावा अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इस मिठाई को खास तौर पर पसंद करते हैं. कई ग्राहक ऐसे हैं, जो रोजाना एक से दो बर्फी खाते हैं. कई लोग इसे पैक कराकर बाहर के शहरों में भी ले जाते हैं.
दुकानदार का कहना है कि जो भी ग्राहक एक बार गुड़ की बर्फी का स्वाद चख लेता है, वह दोबारा जरूर लौटता है. स्वाद के साथ-साथ यह बर्फी लोगों को यह भरोसा भी देती है कि वे मिठाई खाकर सेहत से समझौता नहीं कर रहे हैं. यही वजह है कि गुड़ की बर्फी आज मिर्जापुर में खास पहचान बना चुकी है





