एयर चीफ मार्शल ने बच्चों को सुनाई संघर्ष और सफलता की कहानी, बोले- NDA में अंग्रेजी में फेल हुआ, फिर मेडल लेकर लौटा
गुरुकुल के छात्र आयुष्मान ने पूछा कि एयरफोर्स में आने के लिए किस तरह पढ़ाई करनी चाहिए। एयर चीफ मार्शल ने कहा कि सबसे पहले पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए और प्रवेश के लिए जरूरी न्यूनतम योग्यता हासिल करनी चाहिए। उसके बाद चयन प्रक्रिया और प्रशिक्षण के जरिए एयरफोर्स आगे की तैयारी कराती है। फिर उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण दिया।

बताया कि उनका लक्ष्य डाक्टर बनना था, लेकिन एनडीए में चयन होने के बाद वह सेना में आ गए। उन्होंने कहा कि आज पीछे मुड़कर देखते हैं तो लगता है कि सेना में आना अच्छा हुआ। जब वह एनडीए में गए तो उन्हें अंग्रेजी बहुत अच्छी नहीं आती थी। प्रशिक्षण के दौरान हुई परीक्षा में वह अंग्रेजी में फेल हो गए। इसकी चिट्ठी घर पहुंची तो परिवार के लोग चिंतित हो गए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

मेहनत और अभ्यास जारी रखा। छह महीने बाद जब वह घर लौटे तो स्थिति बदल चुकी थी। उनके हाथ में मेडल था। यही प्रसंग सुनाकर उन्होंने बच्चों को समझाया कि किसी एक परीक्षा में असफल होना अंत नहीं है। गिरना गलत नहीं है, गिरकर उठना जरूरी है। यह बात उन्होंने केवल सफलता का सामान्य मंत्र बताकर नहीं छोड़ी, बल्कि अपने जीवन के अनुभव से जोड़कर बच्चों को समझाई। बच्चों ने पूछा कि परिवार के पहले सेना अधिकारी होने के बावजूद उन्होंने यह मुकाम कैसे हासिल किया।उन्होंने बताया कि परिवार के लोगों को भी शुरू में उम्मीद नहीं थी कि वह यह कर पाएंगे। बचपन में वह शारीरिक रूप से कमजोर थे। डाक्टर बनना चाहते थे, लेकिन एनडीए में चयन ने जीवन की दिशा बदल दी। यदि किसी चीज को ठान लिया जाए और उसके लिए लगातार मेहनत की जाए तो बहुत कुछ संभव है। असफलता आने पर रास्ता बदलने के बजाय अपनी तैयारी और मेहनत को बेहतर करना चाहिए।गांव और शहर का फर्क प्रतिभा की राह में बाधा नहीं है। पढ़ाई करें, जरूरी योग्यता हासिल करें और चयन प्रक्रिया में शामिल हों। चयन के बाद एयरफोर्स प्रशिक्षण देकर आगे की तैयारी कराती है। फाइटर प्लेन उड़ाना केवल साहस का काम नहीं है। इसके पीछे कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और लगातार अभ्यास होता है।





