आज के समय में हम लोगों के पास सफर करने के कई साधन हैं। लोग कार से या बाइक से सफर करते हैं तो वहीं कई सारे लोग मेट्रो और ट्रेन से भी सफर करते हैं। इसके अलावा कई सारे लोग आपको बस से भी सफर करते हुए मिलेंगे। अगर कोई भी इंसान अपने सफर करने वाले वाहन को गौर से देखेगा तो कई सारी चीजों को नोटिस कर सकता है जो उनके मन में सवाल पैदा करेगा मगर आमतौर पर ऐसा कोई नहीं करता है। लेकिन हम आपके लिए वैसे ही सवाल लेकर आते हैं जो आपने कभी सोचा नहीं होता है और फिर आपको उसका जवाब जानने में भी खूब मजा आता है। आज हम आपके लिए बस से जुड़ी एक गजब की जानकारी लेकर आए हैं। आइए उसके बारे में बताते हैं।
बस को कभी गौर से देखा है?
आपने बस में कभी न कभी या फिर खूब सफर किया होगा। अगर ऐसा है तो फिर क्या आपने कभी बस को गौर से देखा है, क्या आपने कभी बस के टायर पर गौर किया है? अगर आपने किया तो क्या आपने कभी यह नोटिस किया है कि बस में पीछे वाले टायर होते हैं, वो बस के बिल्कुल पीछे नहीं होते हैं। बस में पीछे वाले टायर जिस जगह पर लगे होते हैं, वो सेंटर से थोड़ा सा ही पीछे होता है। तो क्या आपने कभी यह सोचा है कि पीछे वाले टायर बिल्कुल पीछे क्यों नहीं लगाए जाते हैं। आइए हम आपको उसके बारे में बताते हैं।
आखिर क्यों किया जाता है ऐसा?
आइए अब आपको बताते हैं कि बस में जो पीछे वाले टायर को बिल्कुल पीछे न लगाकर उससे थोड़ा आगे क्यों लगाया जाता है। दरअसल इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो बसों में पीछे वाले टायर को सबसे पीछे न लगाकर थोड़ा आगे इसलिए लगाया जाता है ताकी वजन का सही से बंटवारा हो सके। इसके साथ ही स्टेबिलिटी बढ़ाने की वजह से भी ऐसा किया जाता है। वहीं बस को मोड़ते समय मैन्यूवरेबिलिटी को बेहतर करने के लिए भी पीछे वाले टायर को थोड़ा आगे लगाया जाता है। टायर को सबसे पीछे नहीं लगाने से बस में पीछे लगे भारी इंजन को सपोर्ट मिलता है और टेल स्विंग से बचाता है। बस के पीछे लगे टायर थोड़े आगे होते हैं तो मोड़ पर बस ज्यादा एरिया कवर नहीं करता है और मोड़ने में भी आसानी होती है।
नोट: इस आर्टिकल में दी गई सारी जानकारी अलग-अलग रिपोर्ट्स और Quora पर लोगों द्वारा दिए गए जवाब पर आधारित है। जगन्नाथ डॉट कॉम इनकी पुष्टि नहीं करता है।





