सीकर
ये प्रेरक कहानी घर की चारदीवारी में रहकर स्वयं को असहाय समझने वाली महिलाओं को मोटिवेट करने वाली है। चार साल पहले पिपराली ब्लॉक के पहाड़ी एरिया के 20 गांवों की महिलाओं को बैंक से स्वरोजगार के लिए ऋण नहीं मिला तो क्षेत्र की पढ़ी-लिखी 5 महिलाओं ने महिला स्वरोजगार की योजना बनाई।
इसके लिए टोडी निवासी बीए तक पढ़ी रिंकू देवी ने वर्ष 2022 में नाबार्ड की मदद से शिक्षित महिलाओं का समूह एफपीओ गठन किया। रिंकू देवी बताती हैं कि समूह ने क्षेत्र की आर्थिक पिछड़े परिवारों की महिलाओं को जोड़कर उनके स्वरोजगार की योजना बनाई। इसके लिए नाबार्ड ने महिला समूह को ग्रांट फंड व सीएसआर फंड से 86 लाख की सहयोग राशि दी। नाबार्ड ने ही अपने खर्चे पर सीओ नियुक्त किया। आज सीकर के पिपराली ब्लॉक का ये देशभर में पहला महिला एफपीओ है जो महिलाओं को ऋण उपलब्ध करवा रहा है। एफपीओ से अब तक 20 गांवों की 1106 महिला जुड़ चुकी हैं। उनमें से 500 महिलाओं को दो करोड़ ऋण दे चुके हैं।
महिला समूह के संचालक मंडल में पांच महिला पदाधिकारी हैं। उनमें संगठन अध्यक्ष की जिम्मेदारी रिंकू देवी को दी गई। वहीं गुड्ढाकला निवासी 12वीं तक पढ़ी सुगनी देवी को सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही कालाखेत निवासी 12वीं पास राजकुमारी, भोजा की ढाणी निवासी आठवीं पास मीरा देवी व पलासरा निवासी आठवीं तक पढ़ी बबीता को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर बनाया गया है। समूह की सदस्यता के लिए प्रत्येक से एक हजार रुपए सदस्यता शुल्क लिया जाता है, जो संगठन कोष में जमा की जाती है। इसके बाद स्वरोजगार के लिए आवेदन करने वाली प्रत्येक महिला सदस्य को अधिकतम 40 हजार रुपए तक 6 प्रतिशत ब्याजदरों पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
^महिलाओं का देशभर में ऐसा पहला एफपीओ गठित कराया गया है, जो बैंकों की तर्ज पर कम ब्याज पर ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध करवा रहा है। जिले में महिला एफपीओ से चार साल के दौरान 500 महिलाओं ने ऋण लेकर बकरी पालन सहित विभिन्न स्वरोजगार शुरू कर अच्छा मुनाफा कमाने लगी हैं।
-एमएल मीणा, सहायक महाप्रबंधक, नाबार्ड,
सीकर। समूह पहाड़ी क्षेत्र के गांवों से जुड़ा हुआ है। दूसरा इन गांवों में महिला शिक्षा का स्तर पर भी कम है। ऐसी स्थिति में महिलाओं से समूह द्वारा बकरी पालन, बकरी के दूध का साबुन, कैटल फीड, मशाला प्रोडक्शन, मिनरल मिक्सचर आदि से जुड़े स्वरोजगार करवाए जा रहे है। सीईओ जगदीश गुर्जर ने बताया कि समूह में टोडी, पापड़ों की ढाणी, बगड़ियों की ढाणी, माधोपुरा, पलासरा, कालाखेत, शोभ, भगोवा, बराल, गुड्डा कला, श्यामगढ़, हाथ्याज, राजपुरा, सांगरवा, हरिपुरा, नांगल, पृथ्वीपुरा, भोजा की ढाणी गांवों आदि गांवों की महिलाओं को शामिल किया गया है।
इन गांवों में केवल श्यामगढ़ में ग्रामीण बड़ोदा बैंक व सांगरवा में कैनरा बैंक की शाखा स्थित है। गुड्डा कला निवासी माना देवी ने दो साल में दो बार 40-40 हजार रुपए का स्वरोजगार ऋण लिया। माना देवी ने बताया कि वह स्वरोजगार ऋण लेकर बकरी पालन व डेयरी व्यवसाय कर रही हैं। इससे सालाना 2 लाख रुपए तक का मुनाफा कमा रही हैं। पलासरा निवासी बबीता देवी कुमावत ने दो साल पहले 40 हजार रुपए ऋण लेकर कैटल फीड का काम शुरू किया था। फिलहाल वह प्रतिमाह तीन हजार रुपए तक कमाने लगी है।





