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57 रुपये में मिलती है आपको 100 की टिकट? रेलवे पर ₹60,000 करोड़ का सालाना बोझ

नई दिल्ली. रेल यात्रा को सस्ता बनाए रखने के लिए सरकार हर साल भारी सब्सिडी देती है. संसद में दी गई जानकारी के अनुसार भारतीय रेलवे ने वर्ष 2024-25 में यात्रियों के टिकट पर कुल 60239 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी. इसका मतलब है कि औसतन हर यात्री को टिकट की असली लागत के मुकाबले करीब 43 प्रतिशत की छूट मिलती है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि अगर किसी यात्रा की वास्तविक लागत 100 रुपये है तो यात्री से औसतन केवल 57 रुपये ही लिए जाते हैं. बाकी राशि सरकार की तरफ से सब्सिडी के रूप में वहन की जाती है.रेल मंत्री ने बताया कि यह सब्सिडी सभी यात्रियों को मिलती है और इसके अलावा कुछ श्रेणियों को अतिरिक्त रियायत भी दी जाती है. इनमें दिव्यांगजन, कुछ गंभीर बीमारियों से जुड़े मरीज और छात्रों की कई श्रेणियां शामिल हैं. सरकार के अनुसार चार श्रेणियों के दिव्यांगजन, ग्यारह प्रकार के मरीज और आठ श्रेणियों के छात्रों को टिकट में अलग से रियायत मिलती है.

किराया तय करने में कई बातों का ध्यान

सरकार का कहना है कि रेल किराया तय करते समय कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है. इसमें सेवा की लागत, अन्य परिवहन साधनों से प्रतिस्पर्धा और आम लोगों की भुगतान क्षमता जैसे कारक शामिल होते हैं. रेल मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि टिकट किराए की जानकारी किसी तरह का व्यापारिक रहस्य नहीं है और यह पूरी तरह सार्वजनिक है. टिकट पर किराए के अलग अलग हिस्सों जैसे मूल किराया, आरक्षण शुल्क, सुपरफास्ट शुल्क और कर की जानकारी भी दिखाई जाती है.

वंदे भारत स्लीपर का किराया कैसे तय होगा

रेल मंत्री ने यह भी बताया कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया प्रति यात्री प्रति किलोमीटर के हिसाब से तय किया गया है. तीसरी वातानुकूलित श्रेणी के लिए यह दर 2.40 रुपये प्रति किलोमीटर रखी गई है, जिसमें कर शामिल नहीं है. उदाहरण के तौर पर यदि दूरी 1000 किलोमीटर है तो तीसरी वातानुकूलित श्रेणी का किराया लगभग 2400 रुपये होगा, जिसमें कर अलग से जोड़ा जाएगा.

बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष व्यवस्था

रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ विशेष व्यवस्थाएं भी लागू की हैं. इनमें बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिला यात्रियों को उपलब्धता के आधार पर निचली बर्थ देने की व्यवस्था शामिल है. इसके अलावा स्लीपर श्रेणी और वातानुकूलित डिब्बों में कुछ निचली बर्थ इन श्रेणियों के यात्रियों के लिए आरक्षित भी रखी जाती हैं, ताकि उन्हें यात्रा के दौरान ज्यादा सुविधा मिल सके.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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