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हाइटेक हॉस्पिटल में क्रॉनिक टेस्टिस पेन का नवीन पद्धति से इलाज

भिलाई। हाइटेक सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल के यूरोलॉजी विभाग ने नवीन पद्धति का उपयोग करते हुए एक रोगी को क्रोनिक टेस्टिस पेन (अंडकोष में लगातार बने रहने वाला दर्द) से निजात दिला दी है। इलाज के बाद चुटकियों में ही मरीज का दर्द जाता रहा और वह मजे से घर लौट गया।

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यूरोलॉजिस्ट डॉ नवीन कुमार वैष्णव ने बताया कि ऑकियाज्या (Orchalgia) या अंडकोष का दर्द अलग अलग कारणों से हो सकता है। ऑकियाज्या या ऑर्कियाल्जिया दैनिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। यह चोट, संक्रमण, नसों की क्षति, हर्निया, या वैरिकोसेले के कारण हो सकता है। यदि दर्द के साथ सूजन, बुखार या मतली हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

इस दर्द पर औषधियों से काबू पाना थोड़ा कठिन होता है। इसका अंतिम इलाज सर्जरी होता है। लंबे समय तक (लगभग तीन महीने) यदि यह दर्द लगातार बना रहता है या रुक रुक कर होता है तो रोगी का जीवन काफी मुश्किल हो जाता है। दर्द अचानक भी उठ सकता है और लगातार भी बना रह सकता है। आम तौर पर यह युवा एवं अधेड़ पुरुषों में देखा जाता है।

डॉ वैष्णव बताते हें कि लगभग 30 साल का यह मरीज जब हमारे पास आया तो वह दर्द में था। उसने कई जगह इलाज कराया था पर कोई भी दवा पूरी तरह राहत नहीं दे पा रही थी। थोड़े ही समय में दर्द वापस आ जाता था। अब उसकी बारम्बरता भी बढ़ने लगी थी। उसे सर्जरी की सलाह दी गई थी।

मरीज के यहां पहुंचने पर उसकी जांचें की गईं। हमने औषधि और सर्जरी के बीच का रास्ता चुना। इस पद्धति में एक इंजेक्शन दिया जाता है। इसके बाद दर्द में लंबे समय तक के लिए स्थायी आराम हो जाता है। इसका लाभ भी लगभग तत्काल मिलता है और अस्पताल में रुकने की जरूरत नहीं होती। मरीज को यह इंजेक्शन दिया गया और अपेक्षानुरूप उसे तत्काल लाभ हुआ और वह खुश होकर घर चला गया। यह एक नई पद्धति है जिसका लाभ कुछ दिनों से लेकर कुछ महीनों तक बना रह सकता है। जरूरत के मुताबिक इस इंजेक्शन को दोहराया जा सकता है। चोट की स्थिति में एक ही इंजेक्शन काफी होता है।

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Manoj Mishra

Editor in Chief

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