देश दुनिया

छत्तीसगढ़ में जंगली भैंसे को वापस लाने के लिए एकजुट हुए 17 गांव

  • कभी महाराष्ट्र, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बड़े हिस्सों में पाया जाने वाला  अब मध्य भारत से लगभग खत्म हो चुका है। आज उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व ही इस क्षेत्र का एकमात्र संरक्षित इलाका है, जहां शुद्ध नस्ल का जंगली भैंसा मौजूद है। यहां 26 साल का एक नर जंगली भैंसा है, जिसे स्थानीय लोग प्यार से ‘छोटू’ कहते हैं
  • बैठक में हुई जंगली भैंसे को बचाने की बात
  • यूएसटीआर के उपनिदेशक वरुण जैन के अनुसार, 14 दिसंबर को 17 ग्राम सभाओं के लीडर की बैठक हुई, जिसमें जंगली भैंसों की संख्या बढ़ाने पर सहमति बनी। इस बैठक में पूर्व सरपंच, गांव के प्रमुख लोग और एनजीओ के लीडर शामिल हुए। गांव वालों ने जंगल में आग रोकने, अवैध पेड़ कटाई बंद करने और कब्जा की गई वन भूमि को खुद से खाली करने का संकल्प लिया, ताकि वन्यजीवों का आवास फिर से बेहतर बनाया जा सके
  • उदंती–सीतानदी में साल 2006 से   भैंसा प्रजनन केंद्र मौजूद है, लेकिन हाल के सालों में संरक्षण प्रयासों को नई गति मिली है। साल 2020 और 2023 में वन विभाग ने असम के मानस नेशनल पार्क से 5 मादा और 1 नर जंगली भैंसे को बारनवापारा सेंचुरी लाया था। यहां उनकी संख्या बढ़कर 11 हो गई है और पिछले दो साल में पांच बछड़ों का जन्म हुआ है।
  • एक्स्पर्ट्स की रहेगी निगरानी
  • अब उदंती–सीतानदी में सेफटी के हालात बेहतर होने के बाद वन विभाग बारनवापारा से तीन मादा जंगली भैंसों को यहां लाने की तैयारी कर रहा है, ताकि नस्ल में इनब्रीडिंग से बचा जा सके। 45 दिन के क्वारंटीन और रेडियो कॉलर लगाने के बाद इन्हें एक्स्पर्ट्स की निगरानी में   में छोड़ा जाएगा। साथ ही, घास के मैदान सुधारे गए हैं, तेजी से फैलने वाले खरपतवार हटाए गए हैं और सोलर से चलने वाले पानी के तालाब तैयार किए गए।
  • भैंसे की वापसी की तैयारी
  • उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसे की वापसी की तैयारी के तहत कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं। भैंसों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एलिफेंट अलर्ट ऐप का उपयोग किया जाएगा, वन भैंसा मित्र दल के जरिए पैदल गश्त बढ़ाई जाएगी और फसल व मवेशी नुकसान के मामलों में 30 दिनों के भीतर मुआवजा देने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने की योजना है। ग्राम सभा फेडरेशन, यूएसटीआर के अध्यक्ष अर्जुन सिंह नायक ने कहा कि राज्य पशु की रक्षा करना स्थानीय समुदायों की जिम्मेदारी है और इसी दिशा में जंगली भैंसों के आवास क्षेत्रों में जाने वाले लोगों के बीच जागरूकता फैलाई जा रही है।
  • साझा प्रयासों से ही बच पाएंगें ये जीव
  • करलाझर गांव के सरपंच साहेबिन श्यामलाल ने बताया कि रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए गांव स्तर पर समितियां बनाई गई हैं। वहीं बीजापुर जिले के इंद्रावती नेशनल में छत्तीसगढ़ में बचे लगभग 20 जंगली भैंसों में से करीब 15 के होने की संभावना है और वन अधिकारियों का कहना है कि इस आखिरी बची आबादी को सुरक्षित रखने के लिए बस्तर इलाकों में शांति बहाल होना बेहद जरूरी है। आईयूसीएन की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त श्रेणी में शामिल जंगली भैंसे का भविष्य अब विज्ञान, सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय समुदायों के साझा प्रयासों पर निर्भर करता है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button