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सिंदूर के पौधे ने बदल दी झारखंड के किसान की किस्मत, बाजार में बिक रहा है हाथों-हाथ, 40000 का हो रहा है मुनाफा!

गोड्डा: झारखंड में गोड्डा जिले के एक साधारण किसान ने अपनी मेहनत और नवाचार से एक अनोखी मिसाल पेश की है. गोड्डा के रहने वाले किसान नागेश्वर मोची ने बिहार के भैरोगंज से सिंदूर का पौधा लाकर अपने खेत में लगाया, जो आज जिले के लोगों के लिए कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बन गया है. यह पौधा न केवल देखने में खास है, बल्कि इससे होने वाली आमदनी ने नागेश्वर की पहचान एक सफल किसान और उद्यमी के रूप में बना दी है.
40000 रुपये की हो जाती है कमाई

किसान नागेश्वर मोची बताते हैं कि उन्होंने यह पौधा पारंपरिक खेती से अलग कुछ नया करने के उद्देश्य से लगाया था. शुरुआत में लोगों को इस पौधे के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन समय के साथ जब इसके फायदे सामने आए, तो आसपास के लोग भी इसे देखने और समझने आने लगे. किसान के अनुसार, इस सिंदूर के पेड़ से सालाना करीब 30 से 40 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है.

जानें कैसे होता है सिंदूर का पेड़

अभी फिलहाल इस पेड़ में लगे फल कच्चे हैं, जिनका रंग हरा दिखाई देता है. समय के साथ यह फल धीरे-धीरे पकते हैं और गहरे लाल रंग में बदल जाते हैं. जब फल पूरी तरह पक जाते हैं, तो इनके अंदर मौजूद बीजों को निकालकर सुखाया जाता है. इसके बाद बीजों से प्राकृतिक सिंदूर तैयार किया जाता है. यह सिंदूर पूरी तरह से बिना किसी केमिकल के होता है. इसलिए इसकी मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है.

केमिकल फ्री रहता है सिंदूर

किसान नागेश्वर बताते हैं कि आज के समय में लोग शुद्ध और प्राकृतिक उत्पादों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. खासकर पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में उपयोग होने वाले सिंदूर के लिए लोग केमिकल-फ्री विकल्प चाहते हैं. इसी कारण उनके द्वारा तैयार किया गया सिंदूर स्थानीय बाजारों में अच्छी कीमत पर बिक जाता है. कई दुकानदार इसे पूजा सामग्री के रूप में हाथों-हाथ खरीद लेते हैं.

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि गोड्डा जिले में इस तरह का पौधा बहुत कम देखने को मिलता है. किसान नागेश्वर मोची की यह पहल न सिर्फ उनके लिए लाभदायक साबित हो रही है. बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ ऐसे औषधीय और उपयोगी पौधों की खेती करें, तो उनकी आमदनी में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है.

 

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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