छत्तीसगढ़

ग्रामीण महिलाओं को आजीविका से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की पहल’

ग्रामीण महिलाओं को आजीविका से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की पहल’
’स्व सहायता समूह से बदल रही तुलेंद्री ठाकुर की जिंदगी’
 सितंबर 2026// कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशानुसार जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। शासन की योजनाओं एवं समूह के माध्यम से मिल रहे सहयोग से जिले की ग्रामीण महिलाएं विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी जनपद पंचायत नारायणपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सुलेंगा (गुरिया) की श्रीमती तुलेंद्री ठाकुर की है। श्रीमती तुलेंद्री ठाकुर मां संतोषी स्व सहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह का गठन वर्ष 2016 में हुआ था तथा यह तिरंगा ग्राम संगठन एवं एकता महिला क्लस्टर संगठन से जुड़ा हुआ है। समूह की महिलाओं द्वारा खेती-बाड़ी, साग-सब्जी उत्पादन सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। समूह को चक्रीय निधि के रूप में 15 हजार रुपये, सामुदायिक निवेश कोष से 60 हजार रुपये तथा बैंक लिंकेज के माध्यम से 6 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। समूह से जुड़ने से पहले श्रीमती तुलेंद्री ठाकुर के परिवार की आजीविका मुख्य रूप से वर्ष में एक बार होने वाली फसल पर निर्भर थी। सीमित आय के कारण परिवार के पालन-पोषण में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। वर्ष 2016 में गांव की महिलाओं को बिहान के स्व-सहायता समूह से जुड़ते देखकर उन्होंने भी समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण एवं विभिन्न आजीविका गतिविधियों के संबंध में जानकारी मिली।
समूह के माध्यम से प्राप्त वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन का उपयोग करते हुए श्रीमती तुलेंद्री ठाकुर ने खेती-बाड़ी के साथ साग-सब्जी उत्पादन एवं अन्य आयमूलक गतिविधियां शुरू कीं। इसके साथ ही समूह के माध्यम से राइस मिल का व्यवसाय भी प्रारंभ किया। राइस मिल के संचालन से उन्हें प्रतिमाह लगभग 9 से 10 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने लगी। समूह की अन्य गतिविधियों से होने वाली आय को मिलाकर वर्तमान में उनकी कुल मासिक आय लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है। समूह से प्राप्त ऋण को समय पर चुकाने के बाद उन्होंने पुनः ऋण लेकर अपनी आजीविका गतिविधियों का विस्तार किया। बढ़ती आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आज श्रीमती तुलेंद्री ठाकुर अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग करने के साथ ही गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनी हुई हैं।
श्रीमती तुलेंद्री ठाकुर बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होने का अवसर मिला, बल्कि बचत और स्वरोजगार के महत्व को भी समझने का अवसर मिला। उन्होंने शासन की योजनाओं एवं बिहान समूह के माध्यम से मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समूह से जुड़कर अब वे आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं। जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर विभिन्न आजीविका गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण, ऋण एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर और मेहनत के बल पर रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही हैं और आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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