अनुमति में विलंब हुआ तो स्वत: मंजूर हो रहे आवेदन, पीडि़त पक्षकार ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं शिकायत,
जोखिम आधारित वर्गीकरण करने वाला पहला राज्य
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने छोटे और मध्यम उद्यमियों को सरकारी विभागों की सुस्ती से राहत देने के लिए कई प्रावधान किये हैं। इसके तहत आवेदन का समय पर निपटारा नहीं होने के सूरत में उसे स्वत: मंजूर मान लिया जाएगा। इसके साथ ही विभाग द्वारा परेशान किए जाने की सूरत में वह ऑनलाइन आवेदन कर सकेगा। क्रियान्वयन पर नजर रखने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कार्यकारी परिषद का गठन किया गया है जबकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति बनाई गई है। जिला स्तरीय समितियों की अध्यक्षता संबंधित जिलों के जिलाधीश करेंगे। इस अधिनियम से लगभग 15 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम उद्यमियों को अनुपालन लागत में कमी, त्वरित स्वीकृतियाँ, समयबद्ध सेवाएँ तथा व्यवसाय करने में सुगमता का लाभ मिलने की अपेक्षा है।
स्वत: मंजूरी का प्रावधान
छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 में विभिन्न विभागों की कारोबारी सेवाओं के लिए तय समय में निर्णय लेने की व्यवस्था की है। निर्धारित समय-सीमा में सक्षम अधिकारी ने आवेदन पर फैसला नहीं किया तो उसे मंजूर माना जाएगा। इससे बिल्डिंग परमिशन, फायर एनओसी, ट्रेड लाइसेंस, पानी कनेक्शन सहित कई सेवाओं के लिए लंबे समय तक कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
समयबद्ध और आसान होगी प्रक्रिया
कारोबार शुरू करने और संचालित करने के लिए अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेने की प्रक्रिया अब आसान और समयबद्ध हो गई है। अधिनियम में आवास एवं पर्यावरण, संस्कृति, गृह, आबकारी, नगरीय प्रशासन, वाणिज्य एवं उद्योग, लोक निर्माण और जल संसाधन विभाग से जुड़ी सेवाओं को शामिल किया गया है।
नगरीय निकायों व आबकारी सेवाएं भी शामिल
नगरीय निकायों से मिलने वाली ट्रेड लाइसेंस, पानी का कनेक्शन, मोबाइल टावर की अनुमति जैसी सेवाएं भी इसके दायरे में रहेंगी। वहीं आबकारी विभाग की सूची में क्लब लाइसेंस, पर्यटन बोर्ड और एयरपोर्ट रेस्तरां बार लाइसेंस तथा विदेशी मदिरा के लेबल पंजीयन जैसी सेवाएं शामिल हैं।
ऑनलाइन शिकायत का प्रावधान
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम में सेवा में देरी अनावश्यक दस्तावेज मांगने या प्रमाणीकरण से इनकार की स्थिति में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था भी होगी।
जोखिम के आधार पर वर्गीकरण
अधिनियम में सेवाओं को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। कम जोखिम वाली गतिविधियों में सेल्फ सर्टिफिकेशन के आधार पर बिना पूर्व भौतिक निरीक्षण के 15 दिन में मंजूरी दिया जाएगा। मध्यम जोखिम वाली सेवाओं में थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन के आधार पर प्रक्रिया पूरी होगी, जबकि उच्च जोखिम वाली गतिविधियों में निर्धारित मानकों के अनुसार जांच के बाद मंजूरी दी जाएगी।
क्यों पड़ी इस अधिनियम की जरूरत?
सरकारी विभागों में काम में सुस्ती, जटिल प्रक्रियाएं और अनुमतियों के कारण उद्योगों को महीनों दफ्तरों के चक्कर काटना पड़ता था। इससे उनकी लागत बढ़ती जाती थी। यह नए उद्योगों व व्यापार के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा रहा है। नए प्रावधान से इस पर रोक लगेगी। स्वत: मंजूरी का प्रावधान अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगा। उन्हें 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने पर मजबूर करेगा। इसी तरह कम जोखिम वाली सेवाओं में ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशनÓ और ‘थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशनÓ लागू होने से हर छोटी अनुमति के लिए होने वाली भौतिक जांच पर लगाम लगेगी।
जोखिम-आधारित वर्गीकरण वाला पहला राज्य
महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में पहले से ऑनलाइन क्लियरेंस और निश्चित समय-सीमा में ‘डीम्ड अप्रूवलÓ का प्रावधान लागू हैं। छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 में इन प्रावधानों के अलावा जोखिम-आधारित वर्गीकरण किया गया है। कम-जोखिम वाले उद्यमों को त्वरित स्वीकृतियाँ, सरलीकृत अनुपालन तथा नियमित सरकारी निरीक्षण के स्थान पर स्व-प्रमाणन की सुविधा प्रदान की जाएगी। समय-सीमा के भीतर बड़े उद्योगों के आवेदन का निस्तारण नहीं होने पर उन्हें स्वत: स्वीकृत माना जाएगा।
उद्यमी स्व-घोषणा प्रस्तुत कर सकते हैं अथवा लाइसेंस प्राप्त अभियंताओं, वास्तुकारों एवं अन्य अधिकृत पेशेवरों से अनुपालन प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं। इससे अनुपालन लागत और अनावश्यक विलंब में कमी आएगी।
लाइसेंस प्रणाली का सरलीकरण
जोखिम-आधारित अनुपालन व्यवस्था लागू कर अनेक मामलों में लाइसेंस एवं परमिट के वार्षिक नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। अधिनियम के अंतर्गत स्व-घोषणा के आधार पर जल कनेक्शन, औद्योगिक समितियों का समयबद्ध पंजीकरण तथा स्व-प्रमाणन या अधिकृत विशेषज्ञों के माध्यम से भवन मानचित्रों की स्वीकृति का प्रावधान किया गया है।
आठ विभागों की 43 सेवाएं शामिल
प्रथम चरण में आठ विभागों की 43 सेवाओं को इस अधिनियम के अंतर्गत शामिल किया गया है, जिसे भविष्य में और विस्तारित किया जाएगा। अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिये त्रि-स्तरीय संस्थागत ढाँचा स्थापित किया गया है, जिसमें— मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कार्यकारी परिषद, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति तथा संबंधित जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समितियाँ। इस अधिनियम से लगभग 15 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम उद्यमियों को अनुपालन लागत में कमी, त्वरित स्वीकृतियाँ, समयबद्ध सेवाएँ तथा व्यवसाय करने में सुगमता का लाभ मिलने की अपेक्षा है।
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