छत्तीसगढ़

अश्वनी कहती हैं-विष्णु भइया की योजना से मिला सहारा, आज अपने पैरों पर खड़ी हूं

*मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से मिला ऋण और अनुदान, रेडीमेड वस्त्र निर्माण से बदली जिंदगी*

*अश्वनी कहती हैं-विष्णु भइया की योजना से मिला सहारा, आज अपने पैरों पर खड़ी हूं*

कवर्धा,  अगस्त 2026। कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड के ग्राम उसरवाही निवासी श्रीमती अश्वनी मेरावी आज अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत सहायता मिलने से उन्होंने पंडरिया में रेडीमेड वस्त्र निर्माण इकाई शुरू की और अपने लिए रोजगार का स्थायी साधन तैयार किया। लाभान्वित अश्वनी मेरावी की परियोजना लागत 2 लाख थी, जिसमें उन्हें 70 हजार का अनुदान प्राप्त हुआ। योजना के माध्यम से मिले ऋण और अनुदान ने उनके सपनों को आकार दिया और उन्हें अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने का अवसर मिला।
अश्वनी बताती हैं कि योजना का लाभ मिलने से पहले वे परित्यक्ता महिला थीं। स्वयं के भरण-पोषण के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ता था। आर्थिक स्थिति कमजोर थी और समाज में भी उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पाता था। रोजगार का कोई स्थायी साधन नहीं होने के कारण जीवन की आवश्यकताएं पूरी करना चुनौतीपूर्ण था। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम ने उनके जीवन में नई दिशा दी। ऋण और अनुदान की सहायता से उन्होंने रेडीमेड वस्त्र निर्माण का काम शुरू किया। आज वे अपने पैरों पर खड़ी हैं, आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं और अपने माता-पिता का सहारा बन रही हैं।
अश्वनी कहती हैं – “विष्णु भइया की इस योजना से मुझे लोन मिला और उसमें सब्सिडी भी मिली। इससे मुझे अपना काम शुरू करने, उसे आगे बढ़ाने और अपने हुनर को दिखाने का मौका मिला। आज मैं आत्मनिर्भर हूं और अपने माता-पिता का सहारा बन पा रही हूं। इसके लिए मैं अपने विष्णु भइया का धन्यवाद करती हूं। अपने व्यवसाय के कारण अश्वनी की समाज में पहचान और मान-सम्मान बढ़ा है। लोगों से उनका संपर्क बढ़ा है और वे आत्मविश्वास के साथ अपने निर्णय ले रही हैं। पहले जहां वे आर्थिक कठिनाइयों से जूझती थीं, वहीं आज अपने रोजगार के माध्यम से सम्मानजनक जीवन जी रही हैं।
मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं, महिलाओं और जरूरतमंद हितग्राहियों को स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को बैंक ऋण के साथ अनुदान की सुविधा दी जाती है, जिससे वे विनिर्माण, सेवा और व्यवसाय से जुड़ी इकाइयां स्थापित कर सकें। योजना के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अश्वनी का सुझाव है कि बैंक ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाना चाहिए। वे बताती हैं कि कई बार हितग्राहियों को बार-बार बैंक जाना पड़ता है और प्रक्रिया में देरी होती है। यदि ऋण प्रक्रिया आसान और समयबद्ध हो, तो अधिक लोग योजनाओं का लाभ लेकर अपना रोजगार शुरू कर सकते हैं।

Manoj Mishra

Editor in Chief

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button