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उज्जैन के प्रोफेसर का कमाल! घर को बनाया इको-फ्रेंडली मॉडल, जीत चुके हैं इंटरनेशनल और नेशनल अवॉर्ड

उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक ऐसे प्रोफेसर हैं, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है. बॉटनी के प्रोफेसर हरीश व्यास का घर प्रकृति के साथ तालमेल का अनूठा उदाहरण है. उन्होंने अपने घर को इस तरह डिजाइन किया है कि हवा, पानी और बिजली- तीनों का अधिकतम उपयोग प्राकृतिक तरीकों से हो सके. उनकी यह पहल न सिर्फ पर्यावरण बचाने का संदेश देती है, बल्कि लोगों को टिकाऊ और आत्मनिर्भर जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा भी देती है.

प्रोफेसर हरीश व्यास यह कोई आम इंसान नहीं, दरअसल माधव साइंस कॉलेज के प्रिंसिपल व्यास सर नाम से जाने जाते हैं. इनका घर ऋषिनगर के पास व्यास नगर स्थित घर अब तक एक इंटरनेशनल और एक नेशनल अवॉर्ड जीत चुका है. आप सोच रहे होंगे कि भला कोई घर अवॉर्ड कैसे जीत सकता है. आइए जानते हैं विस्तार से.

छत पर ऑक्सीजन के साथ मिल रही सब्जियां
उज्जैन के प्रोफेसर हरीश व्यास ने अपने घर को पर्यावरण संरक्षण की अनोखी मिसाल बना दिया है. उन्होंने 1600 वर्गफुट की छत पर करीब 400 वर्ग फुट का खूबसूरत किचन गार्डन विकसित किया है, जबकि शेष हिस्से में सुगंधित पौधे और ताजी सब्जियां उगाई हैं. अपनी बिजली, अपना पानी और अपनी सब्जी’ की सोच पर काम करते हुए उन्होंने 100 से अधिक प्रजातियों के पौधे लगाए हैं. हरियाली की वजह से उनके घर का तापमान आसपास के घरों की तुलना में करीब 2 डिग्री सेल्सियस कम रहता है, जो इसे पूरी तरह इको-फ्रेंडली ग्रीन हाउस बनाता हैकब की थी शुरुआत और कौन सा मिला अवार्ड
प्रोफेसर व्यास बताते हैं कि विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2018 से प्रोफेसर व्यास ने अपने घर की छत पर ऑर्गेनिक गार्डन की शुरुआत की, जो आज पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायक मॉडल बन चुका है. उनके इस अनूठे प्रयास को दो बड़े सम्मान भी मिल चुके हैं. 30 जनवरी 2023 को खजुराहो में उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए इंटरनेशनल अवॉर्ड मिला, जबकि 5 जून 2023 को नगर निगम ने ईको-फ्रेंडली हाउस के लिए नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया. उनके घर का अध्ययन करने कई रिसर्च फेलो पहुंच चुके हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूलों के छात्र भी यहां आकर पर्यावरण संरक्षण की व्यावहारिक सीख लेते हैं.तीन चीजों का बनाया संकल्प
प्रोफेसर ने बताया केवल इसे यहां तक पहुंचाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘अपनी सब्जी, अपनी बिजली और अपना पानी’ के कॉन्सेप्ट पर काम किया गया. जिसके तहत हम पौधे लगाकर अपनी अपनी सब्जी ले रहे हैं. घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर खुद की बिजली जनरेट करते हैं और साथ ही घर को में ऐसा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया है जो बारिश के पानी से लेकर घर में उपयोग के बाद बच्चे वेस्ट पानी को भी शत-प्रतिशत रिसाइकिल करता है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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