भू-जल संवर्धन, हरियाली और कृषि विकास को मिलेगा स्थायी आधार
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकसित भारत जी राम जी योजना के अंतर्गत संचालित ‘मोर गांव, मोर पानी‘ महाअभियान के माध्यम से सरगुजा जिले में जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। अभियान के तहत वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इसी क्रम में जनपद पंचायत अंबिकापुर की ग्राम पंचायत कांतिप्रकाशपुर के पहाड़ी क्षेत्र में 600 स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच (एससीटी) का निर्माण किया गया है, जो भू-जल पुनर्भरण, हरित आवरण विस्तार और कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में पहाड़ी ढलानों पर रिज टू वैली अवधारणा के अनुरूप कंटूर लाइन के आधार पर जिग-जैग स्वरूप में इन ट्रेंचों का निर्माण किया गया है। यह वैज्ञानिक तकनीक वर्षा जल के तेज बहाव को नियंत्रित कर उसे धीरे-धीरे भूमि में समाहित करती है, जिससे भू-जल स्तर में वृद्धि होती है और प्राकृतिक जल स्रोतों का पुनर्भरण संभव होता है।

पहले वर्षा के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों का अधिकांश पानी बहकर निकल जाता था, जिससे मिट्टी का कटाव होता था और जल का समुचित उपयोग नहीं हो पाता था। अब स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंचों के निर्माण से वर्षा जल अधिक समय तक क्षेत्र में ठहरेगा, भूमि में समाहित होगा और आसपास के कुओं, हैंडपंपों तथा अन्य जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में सहायक बनेगा। इससे भविष्य में पेयजल उपलब्धता बेहतर होने के साथ कृषि कार्यों के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा।
अभियान के तहत किए गए कार्यों से कांतिप्रकाशपुर की पहाड़ी का स्वरूप भी बदलता दिखाई दे रहा है। पहले जहां यह क्षेत्र बंजर और सूखा नजर आता था, वहीं अब व्यवस्थित जल संरक्षण संरचनाओं और बढ़ती हरियाली के कारण प्राकृतिक वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगा है। यह पहल मिट्टी संरक्षण, वनस्पति विकास और पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच जल संरक्षण की एक प्रभावी वैज्ञानिक तकनीक है, जो वर्षा जल को भूमि में समाहित कर भू-जल संवर्धन, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा हरित आवरण बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके माध्यम से कृषि उत्पादन बढ़ाने और जल संकट की समस्या के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।
‘मोर गांव, मोर पानी‘ महाअभियान के माध्यम से सरगुजा जिले में जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए स्थायी जल प्रबंधन की मजबूत नींव रखी जा रही है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाएं, ताकि सरगुजा को जल समृद्ध, हरित और आत्मनिर्भर जिला बनाया जा सके।
The post कांतिप्रकाशपुर की पहाड़ी पर बने 600 स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच, वर्षा जल का होगा अधिकतम संचयन appeared first on ShreeKanchanpath.



