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मैं वापस आऊंगा… बंटवारे में बिछड़ी सच्ची प्रेम कहानी, कौन थे प्रीतम-भगवान? जिनका प्यार बना मिसाल

प्यार की तड़प और बिछड़न को दिखाती फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को जिसने भी देखा, वो इम्तियाज अली के सिनेमा का दीवाना हो गया है. बंटवारे के दर्द की प्रेम कहानी को जिस सादगी और खूबसूरती के साथ इम्तियाज ने दिखाया है वो लोगों की आंखें नम कर गया है. शरवरी वाघ और वेदांग रैना ने प्यार के हर जज्बात को दिल से निभाया. तभी तो ये फिल्म और इसके इमोशंस सीधे दिल पर वार करते हैं

बंटवारे में छूटा प्यार का साथ
शरवरी और वेदांग की मोहब्बत की तरह ही 1947 के भारत-पाक बंटवारे ने कई दिलों को जुदा किया था. ऐसी ही एक कहानी है प्रीतम कौर और भगवान सिंह की. उनकी प्रेम कहानी में बंटवारे ने ऐसी चोट मारी कि वो बिछड़ गए. लेकिन कहते हैं ना अगर प्यार सच्चा हो तो उसे कोई सरहद बांधकर नहीं रख सकती. प्रीतम और भगवान के इंतजार की कहानी भी एक दिन खत्म हुई. बिछड़ने के सालों बाद वो मिले और हमेशा के लिए एक हो गए. उनके सच्चे प्यार की गवाही प्रीतम की फुलकारी जैकेट और भगवान सिंह का ब्रीफकेस देता है, इन्हें अमृतसर के पार्टिशन म्यूजियम में संभालकर रखा गया है. डिटेल में जानते हैं इस एपिक लव स्टोरी के बारे में…

कौन थे प्रीतम और भगवान?
प्रीतम और भगवान की सगाई हो चुकी थी. दोनों साथ में घर बसाते लेकिन उनकी लव स्टोरी में ब्रेक लगा. 1947 में प्रीतम को उनके परिवार ने पाकिस्तान के गुर्जनवाला से अमृतसर भेज दिया था. फैमिली ने ये कदम बेटी की सलामती की खातिर लिया था. प्रीतम को अपने प्यार से मिले बिना जाना पड़ा था. दोनों का एक-दूसरे से साथ ऐसा छूटा कि उन्होंने सोचा अब कभी जिंदगी में मुलाकात नहीं होगी

 

प्रीतम से अलग होने पर भगवान की दुनिया बेरंग हो चुकी थी. दंगों में वो अपने तीन भाइयों को खो चुके थे. वो अपनी जान बचाने को अमृतसर भाग. एक ब्राउन ब्रीफकेस में अपने सर्टिफिकेट और प्रॉपर्टी के कागजात लेकर वो अमृतसर की ट्रेन में बैठे. प्रीतम और भगवान लाखों शरणार्थियों के बीच गुम थे, दोनों को एक-दूसरे के वहां होने के बारे में जानकारी नहीं थी. अपनों को खोने और प्यार से जुदा होने का गम उन्हें अंदर से खाए जा रहा था. दोनों को लगने लगा कि उनकी प्रेम कहानी अधूरी ही रहेगी. फिर एक दिन अमृतसर के शरणार्थी शिविर में उनकी मुलाकात हुई. प्रीतम खाने की लाइन में लगी थीं. पीछे से भगवान ने आवाज देकर कहा- क्या आप वहीं हैं? जैसे ही प्रीतम पीछे मुड़ीं तो देखा उनके सामने भगवान खड़े थे.

दोनों की आंखों से आंसू बहने लगे. प्रीतम और भगवान ने मार्च 1948 में शादी की. उस दिन प्रीतम ने वही फुलकारी जैकेट पहनी थी, जिसे वो बंटवारे के दौरान अपने साथ लेकर आई थीं. उनकी फुलकारी जैकेट और भगवान के ब्रीफेकेस को संजोकर पार्टिशन म्यूजियम में रखा गया है. ये बस जैकेट और ब्रीफकेस नहीं, बल्कि उनके प्यार की निशानी है. जो मैसेज देता है कि सच्चा प्यार कभी नहीं हारता है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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