मोहला। विकास के दावों के बीच मोहला क्षेत्र का एक गांव आज भी बुनियादी सड़क सुविधा से वंचित है। करीब 25 वर्षों तक प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बाद भी सड़क नहीं बनने पर ग्रामीणों ने खुद ही पहल करने का फैसला किया है।
ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया है। कोई आर्थिक सहयोग दे रहा है तो कोई श्रमदान कर रहा है। गांव के युवा, बुजुर्ग और महिलाएं भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, ताकि बरसों पुरानी समस्या का समाधान अपने दम पर किया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि कच्चे और जर्जर रास्ते के कारण बरसात के दिनों में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन केवल आश्वासन ही मिले। आखिरकार निराश होकर गांव वालों ने स्वयं ही सड़क बनाने का निर्णय लिया।
ग्रामीणों की यह पहल अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर यह सामूहिक एकजुटता और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
संदेश साफ है— जब व्यवस्था उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, तब गांव वालों ने अपने हौसले और एकता के दम पर खुद अपनी राह बनाने का बीड़ा उठा लिया।




