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रामानुजगंज में मिलीं 96 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि, 1944 में नदी में आई बाढ़, ईश्वर प्रार्थना, गजल भैरवी जैसे विषयों का जिक्र

बलरामपुर-रामानुजगंज: भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देशभर में चलाए जा रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत बलरामपुर जिले से लगातार महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की जानकारी सामने आ रही है. जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में लोग खुद आगे आकर अपने पास सुरक्षित पुरानी पांडुलिपियों और दस्तावेजों की जानकारी प्रशासन को दे रहे हैं. प्रशिक्षित सर्वेयर इन दस्तावेजों का दस्तावेजीकरण कर उन्हें ऑनलाइन अपलोड कर रहे हैं.

रामानुजगंज में मिली 96 साल पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि

इसी कड़ी में रामानुजगंज के मध्य बाजार निवासी रामेश्वर प्रसाद गुप्ता के परिवार के पास करीब 96 साल पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि सुरक्षित मिली है. यह पांडुलिपि उनके पूर्वज लक्ष्मी प्रसाद रौनियार ने वर्ष 1930 और उसके बाद अलग-अलग वर्षों में देवनागरी हिंदी में लिखी थी. इस दुर्लभ पांडुलिपि को देखने बलरामपुर जिले के नोडल अधिकारी रामपथ यादव, सहायक नोडल संजय कुमार गुप्ता और जिला ग्रंथपाल राजकुमार शर्मा गुप्ता परिवार के घर पहुंचे.

पांडुलिपि में दर्ज हैं उस दौर की घटनाएं

पांडुलिपि के संरक्षक रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि इसमें शारदा माता की भक्ति, रामानुजगंज की कन्हर नदी में आई बाढ़, भैरवी, द्रौपदी विनय, गजल, दोहा, चौगोला, दादरा और ईश्वर प्रार्थना जैसे विषयों का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा पांडुलिपि में परिवार का वंश वृक्ष भी चित्रित किया गया है. उन्होंने बताया कि यह उनके दादाजी की लिखी हुई धरोहर है, जिसे परिवार ने वर्षों से संभालकर रखा हैहमारे दादा लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता के द्वारा यह दस्तावेज लिखा गया है इस दस्तावेज में साल 1944 में रामानुजगंज कन्हर नदी में आए बाढ का भी विवरण है जब पाल तहसील का कार्यालय धमनी में लगता था उसका भी जिक्र है और गजल भैरवी गाना हमारे दादा के द्वारा लिखा गया है जो साल 1930 से 1944 के दौरान लिखा गया है इसमें हमारे वंशज का वंशवृक्ष भी लिखा हुआ है जिसमें लगभग पंद्रह पुश्त की जानकारी का उल्लेख है.– रामेश्वर प्रसाद गुप्ता, पांडुलिपि संरक्षक

विरासत बचाने का महत्वपूर्ण अभियान

बलरामपुर जिले के नोडल अधिकारी रामपथ यादव ने बताया कि ज्ञानभारतम अभियान भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति, पांडुलिपियों, पुरातात्त्विक धरोहरों और जनजातीय विरासत के संरक्षण और संवर्धन का महत्वपूर्ण प्रयास है.

ऑनलाइन किया जा रहा दस्तावेजीकरण

एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, जगदलपुर से पहुंचे प्रभारी अधिकारी हरनेक सिंह द्वारा पांडुलिपि का ऑनलाइन अपलोड और दस्तावेजीकरण किया जा रहा है. गुप्ता परिवार द्वारा सुरक्षित रखी गई इस पांडुलिपि की सुंदर हस्तलिपि और उसकी विशिष्ट शैली लोगों को आकर्षित कर रही है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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