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मैं कॉर्पोरेट का गुलाम था… 60 लाख की नौकरी छूटने के बाद बदली जिंदगी

आज के समय में अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी को लोग सफलता की सबसे बड़ी निशानी मानते हैं. लेकिन कई बार जिंदगी में आने वाला बड़ा झटका इंसान की पूरी सोच बदल देता है. दिल्ली के बिजनेसमैन गौरव कावत्रा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उन्होंने बताया कि 60 लाख रुपये सालाना की नौकरी से निकाला जाना उनके जीवन का सबसे बड़ा वरदान साबित हुआगौरव कावत्रा साल 2018 में एक चीनी मल्टीनेशनल कंपनी में डायरेक्टर के पद पर काम कर रहे थे. उस समय उनकी सैलरी करीब 5 लाख रुपये महीना थी. बाहर से उनकी जिंदगी पूरी तरह सफल दिखती थी. अच्छी नौकरी, शानदार पैकेज और बड़ा पद सब कुछ था. लेकिन अचानक एक दिन उनकी जिंदगी बदल गई. कंपनी ने खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए उन्हें नौकरी से निकाल दियाय. ह खबर उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी.नौकरी जाने के बाद टूट गया आत्मविश्वास
गौरव ने लिंक्डइन पर अपनी कहानी शेयर करते हुए बताया कि जब उन्हें नौकरी से निकाला गया, तब उनकी उम्र 37 साल थी और उन पर 2 करोड़ रुपये का होम लोन भी था. उन्होंने कंपनी का टर्मिनेशन लेटर भी शेयर किया. उसमें लिखा था कि उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं था और उन्हें पहले भी इस्तीफा देने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. आखिरकार कंपनी ने तीन दिन का नोटिस देकर उन्हें नौकरी से हटा दिया.
गौरव ने बताया कि उस वक्त उन्हें लगा जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो. उनका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट गया था.

108 फोन कॉल और लगातार रिजेक्शन
नौकरी छूटने के बाद गौरव ने नई नौकरी खोजने की कोशिश शुरू की. लेकिन यह दौर उनके जीवन का सबसे कठिन समय बन गया. उन्होंने बताया कि उन्होंने 108 लोगों को फोन किए, लेकिन ज्यादातर जगहों से उन्हें निराशा ही मिली. कई लोगों ने जवाब तक नहीं दिया और कुछ ने केवल सहानुभूति दिखाई. लगातार रिजेक्शन और तनाव की वजह से उनकी मेंटल हेल्थ खराब होने लगी. उन्होंने कहा कि उस समय वे हर रात 12 से 15 सिगरेट तक पीने लगे थे. उन्हें ठीक से नींद नहीं आती थी और अंदर ही अंदर वे टूटते जा रहे थे.

गौरव ने बताया कि बेरोजगारी का असर सिर्फ उन पर नहीं, बल्कि उनके परिवार पर भी पड़ा. पड़ोसी उन्हें घर पर देखकर सवाल पूछते थे. कई बार उनके पास जवाब तक नहीं होता था. उन्होंने महसूस किया कि नौकरी जाने के बाद समाज का व्यवहार भी बदलने लगता है. यही समय उनके लिए सबसे ज्यादा मुश्किल था.

जिंदगी ने सिखाया बड़ा सबक
धीरे-धीरे गौरव ने अपनी सोच बदलनी शुरू की. उन्होंने समझा कि नौकरी ही जिंदगी नहीं होती और किसी एक कंपनी पर पूरी तरह निर्भर रहना सही नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्होंने 12 साल तक सिर्फ अपनी डिग्री और कॉर्पोरेट नौकरी के भरोसे करियर बनाया. लेकिन बाद में एहसास हुआ कि असली ताकत लगातार नए स्किल सीखने में होती है. गौरव का मानना है कि असफलता को दिल पर लेने के बजाय उससे सीखना चाहिए. हर रिजेक्शन इंसान को मजबूत बनाता है.

कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ शुरू किया नया सफर
एक समय ऐसा आया जब गौरव ने तय किया कि अब वे खुद कुछ बड़ा करेंगे. इसके बाद उन्होंने बिजनेस और कंसल्टिंग की दुनिया में कदम रखा. आज गौरव कावत्रा दावा करते हैं कि उन्होंने अपने दम पर अपना करियर दोबारा खड़ा किया. उन्होंने कई बड़ी कंपनियों के साथ काम किया और 6500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं में सलाहकार के रूप में योगदान दिया.

नौकरी से निकाला जाना मेरा नया जन्म था
गौरव का कहना है कि जिस दिन उन्हें नौकरी से निकाला गया था, उसी दिन से उनकी जिंदगी का नया सफर शुरू हुआ. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा- नौकरी से निकाला जाना मेरा अंत नहीं था, बल्कि मेरी जिंदगी का नया जन्म था.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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