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बंगाल के फलता में पुनर्मतदान जारी, सुबह 9 बजे तक 20% वोटिंग

नई दिल्ली। बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर बेहद कड़ी सुरक्षा में पुनर्मतदान जारी है। मतदाता अपना वोट डालने के लिए मतदान केंद्र पर पहुंच रहे हैं। चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को पहले की तुलना में दोगुना कर दिया है।दरअसल, बंगाल में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के दौरान यहां दूसरे चरण में 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन चुनाव के जदौरान लगे गड़बड़ी के आरोप के बाद बाद चुनाव आयोग ने फिर से मतदान कराने का निर्णय लिया था।

  • पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा के बीच पुनर्मतदान (Repoll) जारी है।  चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, आज सुबह 9 बजे तक मतदान का रुझान लगभग 20.47% रहा।
  • फलता विधानसभ में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान जारी।
  • मतदान केंद्रों पर मतदाता पहुंच रहे हैं, चुनाव आयोग ने मतदान केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है।
  • TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने ऐन वक्त पर छोड़ा मतदान।
  • दोबारा चुनाव के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की कुल 35 कंपनियां तैनात की गई हैं, जिसमें हर बूथ पर आठ जवान मौजूद हैं।
  • एक मतदाना ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान बताया कि “यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा मेरे बचपन में हुआ करता था। 15 साल पहले हमें वोट डालने से डर लगता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। 15 साल पहले तो हमें बूथ तक आने की भी इजाज़त नहीं थी, गुंडे हमें गेट पर ही रोक देते थे… आज मैं बहुत खुश हूं।”

फलता विधानसभा क्षेत्र से BJP उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने कहा, “माहौल ठीक है, कोई दिक्कत नहीं है। उत्सव जैसा माहौल है। वोटर आ रहे हैं, वोट डाल रहे हैं और जा रहे हैं। माहौल बहुत अच्छा है। BJP ही जीतेगी… मुझे नहीं पता कि पुष्पा (जहांगीर खान) कहां हैं। उन्हें (जहांगीर खान को) एहसास हो गया है कि उन्हें 5-7 हजार से जहाज वोट नहीं मिलेंगे, इसलिए उन्होंने ये सब बातें कहीं… लोग खुशी-खुशी वोट डाल रहे हैं, BJP डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीतेगी।”

जहांगीर खान ने छोड़ा मैदान

बता दें कि पुनर्मतदान से 48 घंटे पहले तृणमूल प्रत्याशी जहांगीर खान चुनावी मैदान छोड़ दिए थे। मंगलवार को चुनाव प्रचार के आखिरी दिन जहांगीर ने एलान किया, “मैं अब यह चुनाव नहीं लड़ रहा हूं।”

हालांकि, खान ने चुनाव से हटने की घोषणा कर दी थी, फिर भी उनका नाम EVM पर बना रहा, क्योंकि वह आधिकारिक तौर पर अपनी उम्मीदवारी वापस नहीं ले पाए थे। चूंकि नामांकन वापस लेने की तारीख पहले ही बीत चुकी है, इसलिए ईवीएम पर जहांगीर खान का नाम और चुनाव चिह्न बरकरार रहेगा, लेकिन वे व्यक्तिगत रूप से रेस से बाहर हो चुके हैं। अन्य उम्मीदवारों में BJP के देबांग्शु पांडा, CPI(M) के शंभू नाथ कुर्मी और कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला शामिल हैं।

क्या बोले जहांगीर खान?

जहांगीर खान ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फलता के विकास के लिए ‘स्पेशल पैकेज’ की घोषणा की है। मैं इस चुनाव से पीछे हट रहा हूं।” हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि क्या यह फैसला अभिषेक बनर्जी या तृणमूल शीर्ष नेतृत्व के किसी निर्देश पर लिया गया है।

क्या बोले सीएम शुभेंदु?

वहीं, बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि ‘वह इसलिए भाग गया क्योंकि उसे कोई पोलिंग एजेंट नहीं मिलेगा।’

चुनाव अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट पर दोबारा चुनाव के लिए गुरुवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच वोटिंग शुरू हो गई है। दोबारा चुनाव में 285 बूथों पर 2.36 लाख से ज्यादा लोग वोट डालने के हकदार हैं, जिनमें 1.15 लाख महिलाएं और नौ तीसरे लिंग के लोग शामिल हैं। वोटिंग सुबह 7 बजे शुरू हुई।

सुरक्षा के पुखता इंतजाम

अधिकारियों ने बताया कि दोबारा चुनाव के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की कुल 35 कंपनियां तैनात की गई हैं, जिसमें हर बूथ पर आठ जवान (एक पूरी टुकड़ी के बराबर) मौजूद हैं। इसके अलावा, किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए 30 क्विक रिस्पॉन्स टीमें (QRTs) भी तैयार रखी गई हैं

क्यों रद हुआ था चुनाव?

इस विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक तनाव तब से बढ़ा हुआ है, जब कई बूथों से ये आरोप सामने आए कि पिछली वोटिंग के दौरान EVM पर परफ्यूम जैसे पदार्थ और चिपकने वाली टेप लगाई गई थी। चुनाव आयोग के पूर्व विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने इस विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया और जांच-पड़ताल की, जिसके बाद कम से कम 60 बूथों पर कथित छेड़छाड़ के सबूत मिले।

EVM के साथ कथित छेड़छाड़ के अलावा, अधिकारियों को कई मतदान केंद्रों पर लगे वेब कैमरों में कैद फुटेज के साथ भी छेड़छाड़ की कोशिशें मिलीं। इसके बाद बूथ-स्तरीय अधिकारियों (BLOs), पीठासीन अधिकारियों, मतदान कर्मियों और चुनाव पर्यवेक्षकों की भूमिका पर सवाल उठाए गए।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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