बाड़मेर. महज पांचवीं कक्षा तक पढ़े केवालाराम ने कभी हार को अपनी किस्मत नहीं बनने दिया. सीमित पढ़ाई, कम संसाधन और तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने ऐसा स्टार्टअप खड़ा किया है जिसकी आज हर तरफ चर्चा हो रही है. करीब 80 लाख रुपए का टर्नओवर, 6 हजार महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का मिशन. केवालाराम ने साबित कर दिया कि सफलता डिग्री से नहीं बड़े इरादों और मेहनत से मिलती है.
केवालाराम ने बेहद छोटे स्तर से काम शुरू किया. शुरुआती दिनों में आर्थिक तंगी, बाजार में पहचान की कमी और लोगों का भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती थी. कई बार मुश्किलें आई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. धीरे-धीरे उन्होंने महिलाओं को अपने साथ जोड़ना शुरू किया. उन्होंने गांव और छोटे कस्बों की महिलाओं को काम से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता दिखाया.
5वी पास, सालाना टर्न ओवर 80 लाख रुपये
महाबार निवासी केवलाराम महज 5वीं तक पढ़े हुए है लेकिन हुनर और लग्न से आज 80 लाख रुपये सालाना टर्नओवर वाली हैंडीक्राफ्ट कंपनी खड़ी कर ली है. अब केवलाराम न केवल हजारों लोगों को रोजगार दे रहा है बल्कि गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है. केवलाराम मेघवाल ने 2017 में “सविता हस्तकला सेवा संस्थान” की नींव रखी. शुरुआत महज 20 महिलाओं के साथ की थी जो अब बढ़कर 30 गांवों की 3500 से 4000 महिलाओं तक पहुंच चुकी है.पेंचवर्क, एप्लिक, कुशन कवर,बेडशीट बनाने का काम करती है महिलाएं
संस्थान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को पेंचवर्क, एप्लिक वर्क, कुशन कवर, बेडशीट, पिलो कवर और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों का प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर उन्ही सुई धागों के हुनर से विदेशो तक इसके उत्पाद पहुँचाए जाते है. इसके साथ ही 6 हजार महिलाएं उनसे जुड़ी हुई है जिनके आर्टिजन कार्ड बनाए गए है.
6 हजार महिलाओं को जोड़ा, बदली हजारों घरों की तस्वीर
आज केवालाराम की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ कारोबार नहीं है बल्कि करीब 6 हजार महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना है. इनमें कई महिलाएं ऐसी थीं जिनके पास पहले आय का कोई साधन नहीं था. इस पहल से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. कई परिवारों की आय बढ़ी, बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतें बेहतर तरीके से पूरी होने लगीं है.
करीब 4 हजार महिलाओं को दे रहे रोजगार
केवलाराम मेघवाल के मुताबिक सुई-धागे का हुनर ही असली ताकत है. मेरा सपना है कि हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो और बाड़मेर का नाम दुनिया में रोशन करे. वे बताते है कि वे ज्यादा पढ़े-लिखे नही है लेकिन 3500 से 4000 महिलाओं को रोजगार दे रहे है. वे बताते है कि उनके यहां के उत्पाद जापान और अमेरिका तक पहुँच रहे है.





