सागर: भीषण गरमी में पशुओं के चारे का इंतजाम करना कठिन चुनौती होता है. पशुपालक इंतजाम करने में नाकाम भी रहते हैं. कृषि की आधुनिक तकनीक और मध्य प्रदेश आजीविका मिशन के तहत जिले की 16 गौशालाओं में हरा चारा बिना मिट्टी के सिर्फ पानी से तैयार किया जा रहा है. खास बात ये है कि हाइड्रोपोनिक तकनीक से उगाए जा रहे चारे को पशुपालक खरीद रहे हैं. अब तक इन गौ शालाओं को 5 लाख से ज्यादा की कमाई हो चुकी है. 5 रुपए प्रति किलो की दर से ये चारा बेचा जा रहा है. सागर प्रदेश का एकमात्र जिला है, जहां हाइड्रोपोनिक तकनीक से चारा उगाकर कमाई के साथ पशुओं को भीषण गरमी में हरा चारा मिल रहा है.
जिले की 16 गौशालाओं में अभिनव प्रयोग
मध्य प्रदेश आजीविका मिशन के तहत जिले में संचालित गौ शालाओं का संचालन महिला स्व सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है. इन गौशालाओं में बिना मिट्टी या जमीन के ट्रे में हरा चारा तैयार किया जा रहा है. सागर प्रदेश का इकलौता जिला है, जहां पर हाइड्रोपोनिक तकनीक से ये प्रयोग किया जा रहा है. इस तकनीक के तहत बगैर मिट्टी के पशुओं के लिए हरा चारा तैयार किया जा रहा है. महिलाएं गौशाला में ही एक कमरे के अंदर केवल पानी का उपयोग करके हरा चारा तैयार कर रही हैं. इस तकनीक में एक किलो बीज से 7 किलो हरा चारा हो रहा है. ये किफायती होने के साथ भीषण गरमी के दौरान गायों के लिए भरपूर पोषण देने वाला है.
गायों को पोषण के साथ महिलाओं को आमदनी
हाइड्रोपोनिक तकनीक से तैयार हो रहे चारे से न सिर्फ गरमी के मौसम में गौपालकों की चारे की समस्या खत्म हो गयी है, बल्कि गौशालाएं संचालित करने वाली महिलाओं की आमदनी भी बढ़ गयी है. इस तकनीक से एक किलो बीज से 7 किलो चारा तैयार हो रहा है. गांवों में आसानी से मक्के, गेंहू और ज्वारा के बीज 12 से 15 रूपए किलो तक मिल जाते हैं और इस एक किलो बीज से 7 किलो तक चारा तैयार हो जाता है.ये चारा 5 रूपए प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है. इस प्रकार महज 15 रुपए की लागत पर महिलाओं को 35 रुपए मिल रहे हैं और 20 रुपए की आमदनी एक किलो बीज से चारा उगाने पर हो रही है. इन गौशालाओं में महिलाएं अब तक 26 किलो 880 ग्राम चारा तैयार कर चुकी हैं. इस तकनीक से महिलाओं को 5 लाख 37 हजार 600 रुपए का फायदा हुआ है.मध्य प्रदेश आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक कृषि अनूप तिवारी बताते हैं कि “हाइड्रोपोनिक तकनीक से तैयार हो रहे चारे में कैल्सियम, प्रोटीन के साथ पड़वर भी होता है. इस कारण ये गार्यों के लिए आम चारे को अपेक्षा ज्यादा पोषण देने वाला होता है. यह आधुनिक तकनीक है, जिले में 16 गौशालाओं में शुरुआत कराई है. इस तकनीक में पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सीधे पानी के माध्यम से दिया जाता है. इसके लिए कमरे के अंदर ट्रे में बीज रखकर उनमें अंकुरण कराया जाता है. निर्धारित मात्रा में पानी की धारा छोड़ी जाती है. पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्व पानी के माध्यम से दिए जाते हैं.
जिले में इन जगहों पर हरा चारा हो रहा तैयार
सागर जिले के देवरी विकासखंड में रायखेडा, केसली में पटना खुर्द, रेगाझोली, रहली में बलेह, छिरारी, शाहगढ में बरायठा, दलपतपुर, बंण्डा में भेडाबमूरा, मालथोन में हडली व बरोदिया, खुरई में बसारी, राहतगढ़ में झिला और जैसीनगर में बासा. खामकुआं में ये खेती की जा रही है. गौशालाओं को सस्ता हरा चारा उपलब्ध हो रहा है. पोषण युक्त चारा मिलने से गर्भधारण की क्षमता में वृध्दि हुई है. कृत्रिम गर्भाधान में साहीवाल, गिर उन्नत नस्ल से कराया जा रहा है.





