भारत में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक एक ऐसा सिरदर्द बन चुका है जिसका समाधान मिलना मुश्किल लग रहा था. लेकिन हैदराबाद के नाचाराम इलाके से एक ऐसी प्रेरक खबर सामने आई है, जिसने पर्यावरण प्रेमियों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है. यहाँ स्थित ‘इको भारत’ (Eco Bharat) नामक एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ने बायोडीग्रेडेबल पैकेजिंग की दुनिया में एक बड़ी क्रांति का सूत्रपात किया है. यह यूनिट मक्के के स्टार्च का उपयोग करके ऐसे बैग्स बना रही है जो प्लास्टिक को पूरी तरह रिप्लेस करने की ताकत रखते हैं.इको भारत की सबसे बड़ी ताकत इसकी विश्वसनीयता है. यहाँ बनने वाले हर बैग को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा मान्यता प्राप्त है. इसका मतलब यह है कि ये बैग्स न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि सुरक्षा के कड़े मानकों पर भी खरे उतरते हैं. फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की रिसर्च के बाद मक्के के दानों (Corn Starch) और अन्य प्राकृतिक तत्वों के मिश्रण से यह फॉर्मूला तैयार किया हैकैसे काम करता है यह ‘जादू’?
अक्सर लोगों को लगता है कि बायोडीग्रेडेबल बैग्स टिकाऊ नहीं होते, लेकिन इको भारत के बैग्स इस धारणा को तोड़ते हैं.
बड़े ब्रांड्स की पहली पसंद
पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण आज कई दिग्गज संस्थान इको भारत के साथ हाथ मिला चुके हैं. वर्तमान में यह यूनिट रामोजी फिल्म सिटी, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम, लुलु मॉल, नीलोफर कैफे और महफिल जैसे नामी संस्थानों को थोक में सप्लाई दे रही है. यहाँ ग्राहकों की मांग के अनुसार कस्टमाइज्ड प्रिंटिंग और विभिन्न आकारों के बैग्स बनाने की विशेष सुविधा भी उपलब्ध है.
स्वच्छ भारत की ओर एक बड़ा कदम
प्लास्टिक बैन के बावजूद बाजार में सही विकल्प न होने की वजह से लोग मजबूरन प्लास्टिक का उपयोग करते थे. लेकिन अब ‘इको भारत’ जैसी इकाइयां एक नई उम्मीद बनकर उभरी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शहरों में इस तरह के बायोडीग्रेडेबल विकल्पों को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए, तो कचरा प्रबंधन की समस्या 70% तक कम हो सकती है.





