नई दिल्ली। हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा से ही खाने-पीने से जुड़े कई ऐसे नियमों का पालन करते आए हैं, जिन्हें हमने देखा या सुना तो जरूर होगा, लेकिन उनकी वजह शायद ही जानते होंगे। ऐसा ही एक नियम आटा गूंथने से जुड़ा हुआ है। आपने अक्सर यह गौर किया होगा कि रोटी बनाने के लिए आटा गूंथते समय अक्सर उसपर उंगलियों के निशान या छोटे-छोटे गड्ढे बनाए जाते हैं।हम में से कई लोगों ने अपनी दादी-नानी और मम्मी को ऐसा करते देखा होगा, लेकिन शायद ही कभी किसी ने वजह जानने की कोशिश की होगी। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे आखिर क्यों आटा
प्राचीन मान्यताओं से जुड़ी वजह
यह कोई सामान्य आदत या कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे हमारे शास्त्रों और प्राचीन मान्यताओं से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प रहस्य छिपा है। सदियों से हमारी भारतीय परंपरा में रसोई को घर का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है। यह सिर्फ खाना बनाने की एक जगह नहीं, बल्कि इसका सीधा असर घर की बरकत, हमारे स्वास्थ्य और भाग्य पर पड़ता है।
पूर्वजों और ‘पिंडदान’ से जुड़ा है इसका गहरा कनेक्शन
हिंदू धर्म में पूर्वजों यानी ‘पितरों’ से जुड़ी ‘पिंडदान’ की प्रक्रिया को काफी अहम और जरूरी माना जाता है। जब परिवार का कोई सदस्य इस दुनिया को छोड़कर चला जाता है, तो उसकी आत्मा की शांति और उन्हें स्वर्ग भेजने के लिए पिंडदान किया जाता है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, पिंडदान की पूरी प्रक्रिया में पके हुए चावल या गूंथे हुए आटे का एक गोल आकार का पिंड (गोला) बनाया जाता है। इन्हें भोजन के रूप में हमारे पितरों तक पहुंचाया जाता है। आटा गूंथने पर उंगलियों के निशान का कनेक्शन इसी से जुड़ा हुआ है।
क्यों होते हैं गूंथे हुए आटे पर उंगलियों के निशान?
गूंथे हुए आटे पर उंगलियों का निशान भी इसलिए बनाया जाता है। दरअसल, जब हम अपनी रसोई में आटा गूंथकर उसे बिल्कुल चिकना और गोल आकार देते हैं, तो वह दिखने में बिल्कुल पूर्वजों के लिए बनाए गए ‘पिंड’ के जैसा हो जाता है।
शास्त्रों के अनुसार पितरों के भोजन के समान दिखने वाले इस गोल आटे से बनी रोटियां खाने से अनजाने में भी पाप लग सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बिना किसी निशान वाले चिकने आटे की गोले को पूर्वजों का हिस्सा मान लिया जाता है, जिसे जीवित लोगों को ग्रहण नहीं करना चाहिए।
दोष से बचने के लिए बनाते हैं निशान?
ऐसे में इस अनजाने पाप से बचने के लिए अक्सर महिलाएं आटा गूंथने के बाद तुरंत उस पर अपनी उंगलियों को दबाकर निशान बना देती हैं। उंगलियों से बने ये निशान इस बात का सबूत होते हैं कि यह आटा पूर्वजों के लिए रखा गया कोई ‘पिंड’ नहीं है, बल्कि घर के सदस्यों का पेट भरने के लिए गूंथा गया है।
इतना ही नहीं यह नियम सिर्फ आटे तक ही सीमित नहीं है। आटे के अलावा घर में जब बाटी, बाफले या बालूशाही जैसी गोल चीजें बनाई जाती हैं, तो उन्हें पूरी तरह गोल नहीं छोड़ा जाता। तलने या सेंकने से पहले उनके बीच में भी उंगली या अंगूठे से एक हल्का-सा गड्ढा कर दिया जाता है।





