शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर में इस बार बैसाखी ऐतिहासिक होगी। मंदिर परिसर में स्थित पवित्र सरोवर में 5 महीने की कारसेवा के बाद जल भरने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर जारी है। 14 अप्रैल को बैसाखी पर यहां श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे तो उन्हें एक साथ सात पवित्र नदियों- गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, नर्मदा, सिंधु और कावेरी में स्नान का पुण्य मिलेगा। इन सातों नदियों में स्नान का अलग-अलग फल प्राप्त होता है।
इसी के मद्देनजर श्री देवी तालााब मंदिर के पवित्र सरोवर में जल भरने का काम शुरू कर दिया गया है। सोमवार तक सरोवर में पानी पूरी तरह भर जाएगा और मंगलवार को शुभ स्नान होगा। इससे पहले 13 तारीख को मंदिर के शाही दरबार में माता रानी की विशाल चौकी होगी। चौकी की शुरुआत रात 8 बजे पूजन से होगी। गंगा स्नान : पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस पवित्र जल में स्नान का फल अश्वमेघ यज्ञ के समान माना गया है। गंगा आत्मा की शुद्धि का साधन मानी जाती हैं। यमुना स्नान : अकाल मृत्यु से रक्षा होती है। हृदय में भक्ति का संचार होता है और मन के विकार दूर होते हैं। जातक के भीतर की मानसिक तपन (क्रोध, ईर्ष्या) शांत होती है।
सरस्वती स्नान : ज्ञान में बढ़ोतरी होती है। अज्ञान का नाश होता है। ईश्वर भक्ति में मन लगता है। वाणी का दोष दूर होता है और विचार शुद्ध होते हैं। बुरे ख्याल नहीं आते। गोदावरी स्नान : भक्त को प्रभु श्री राम की कृपा सहज ही प्राप्त होती है। सात पीढ़ियों का उद्धार हो जाता है। बड़े से बड़े ज्ञात-अज्ञात पापों का शमन होता है। नर्मदा स्नान : साधक को मोक्ष और कठिन संकल्पों को पूर्ण करने की शक्ति मिलती है। चर्म रोग से राहत मिल जाती है। मानसिक अशांति का नाश होता है।
सिंधु स्नान : शरीर के रोगों का नाश होता है और मन में साहस का संचार होता है। वरुण देव प्रसन्न होते हैं, जिससे जातक को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। कावेरी स्नान : सभी कायिक (शारीरिक), वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हो जाते हैं। दुख खत्म हो जाते हैं। भक्त को वैकुंठ धाम की प्राप्ति का मार्ग सुलभ होता है।
सोमवार शाम तक सरोवर को उसकी पूरी क्षमता के साथ भर दिया जाएगा। .प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग द्वार होंगे। .स्नान के वक्त बैरिकेडिंग और वॉलिंटियर्स तैनाती रहेंगे ताकि कोई हादसा न हो। .पूरा मंदिर परिसर और सरोवर क्षेत्र सीसीटीवी कैमरों से निगरानी में रहेगा।





