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बदली जाएंगी आंगनबाड़ियों में वितरित साडियां, कम लंबाई की शिकायत के बाद एक्शन में विभाग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वितरित की गई कम लंबाई और खराब गुणवत्ता वाली साड़ियों को बदला जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिलों में कार्यक्रम अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। विभाग ने कहा है कि वे साड़ियों की जांच करें और जहां भी मापदंड (5.5 मीटर) से कमी पाई जाए, उन्हें तत्काल वापस लेकर दूसरी साड़ियां दी जाएं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कहीं भी मापदंड से कम लंबाई की साड़ियों का वितरण न किया जाए।

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बता दें महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेश भर में संचालित आंगनवाड़ियों में कार्यकर्ता व सहायिकाओं के लिए साड़ियों का वितरण किया गया था। वितरण के बाद ऐसी शिकायतें मिली जिसमें कहा गया कि साड़ियों की लंबाई तय मानक 6.50 मीटर से कम 5.50 मीटर है। इसके कारण इसे पहनना मुश्किल हो रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग तक जब यह बात पहुंची तो इसे गंभीरता से लेते हुए जांच का निर्देश दिया गया।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि खराब साड़ियों को वापस लेकर मानकों के अनुरूप नई साड़ियां दी जाएंगी। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्यभर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी वर्दी के रूप में वितरित की गई थी। यह वितरण केंद्र सरकार के प्रावधानों के तहत किया जाता है, जिसके अनुसार प्रत्येक कार्यकर्ता और सहायिका को साल में दो साड़ियां दी जाती हैं। प्रति साड़ी 500 रुपए की लागत निर्धारित है। इसी आधार पर राज्य में लगभग 1.94 लाख साड़ियों की आपूर्ति का आदेश छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़ी एजेंसी को दिया गया था।

विभाग द्वारा साड़ियों के रंग, डिजाइन और लंबाई के स्पष्ट मानक तय किए गए थे। नियमानुसार साड़ी की लंबाई 5.50 मीटर और ब्लाउज पीस सहित कुल लंबाई 6.30 मीटर निर्धारित की गई थी। इसमें 5% तक की सहनशीलता (टॉलरेंस) रखी गई है, अर्थात 5.50 मीटर की साड़ी 5.25 मीटर तक तथा 0.80 मीटर के ब्लाउज पीस की लंबाई 0.76 मीटर तक हो सकती है। इस प्रकार कुल लंबाई 6.00 मीटर से 6.30 मीटर के बीच स्वीकार्य है, जो कि बाजार में प्रचलित मानक आकार भी है।

साड़ियों की आपूर्ति से पहले नमूनों की गुणवत्ता की जांच तकनीकी एजेंसी राइट्स लिमिटेड, मुंबई द्वारा कराई गई थी, जिसमें नमूने मानकों के अनुरूप पाए गए थे। हालांकि वितरण के बाद दुर्ग, धमतरी, रायगढ़ और कबीरधाम जिलों से कई शिकायतें सामने आईं। इनमें कुछ साड़ियों की लंबाई कम होने, कुछ के क्षतिग्रस्त होने और रंग छोड़ने जैसी समस्याएं बताई गईं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने तत्काल जांच समिति गठित कर पूरे मामले की जांच कराई।

जांच में पाया गया कि कुछ साड़ियों की लंबाई निर्धारित मानक से कम थी और बुनाई में भी खामियां थीं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि साड़ियां सूती (कॉटन) की हैं, इसलिए पहली धुलाई में कुछ मामलों में रंग छोड़ने की स्थिति सामने आई, लेकिन बाद में रंग सामान्य हो गया। मामले के सामने आने के बाद शासन ने सभी जिलों को निर्देश जारी किए हैं कि वे साड़ियों की दोबारा जांच करें और जहां भी लंबाई कम या साड़ियां क्षतिग्रस्त पाई जाएं, उनकी रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर भेजें। साथ ही छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को निर्देशित किया गया है कि जिन साड़ियों में खामी पाई गई है, उन्हें तुरंत बदलकर नई एवं मानक के अनुरूप साड़ियां उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही बाजार में साड़ियों के दाम की जांच करने पर यह पाया गया कि इसी प्रकार की साड़ियां 475 से 600 रुपये के बीच उपलब्ध हैं, जो आपूर्ति की गई साड़ियों के मूल्य के अनुरूप है।

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Manoj Mishra

Editor in Chief

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